वाराणसी : उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद ने प्रदेश के सभी जनपदों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) को परिषदीय विद्यालयों के अध्यापकों की वरिष्ठता सूची तैयार करने के संबंध में निर्देश जारी किए हैं। परिषद के सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी की ओर से जारी पत्र के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया तय समयसीमा के भीतर पूरी की जानी है।
सबसे पहले जिला स्तर पर अनंतिम ज्येष्ठता (वरिष्ठता) सूची प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद शिक्षकों से आपत्तियां प्राप्त कर उनका निस्तारण किया जाएगा, जिसके उपरांत अंतिम वरिष्ठता सूची को रूप दिया जाएगा। जनपद स्तर पर वरिष्ठता सूची तैयार करने की पूरी कार्यवाही तीन सप्ताह के भीतर पूर्ण कर परिषद कार्यालय को 23 अक्टूबर तक उपलब्ध करानी होगी।
उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा अध्यापक सेवा नियमावली 1981 (अद्यतन संशोधित) के नियम-18 (पदोन्नति प्रक्रिया) और नियम-22 (ज्येष्ठता निर्धारण) के प्रविधानों के तहत यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी। मौलिक नियुक्ति तिथि, स्थानांतरण और पूर्व अदालती फैसलों (जैसे 68500 सहायक अध्यापक भर्ती मामले) के निर्देशों को भी इसमें ध्यान में रखा गया है।
शासन स्तर से इस मामले में विशेष सचिव बेसिक शिक्षा और शिक्षा निदेशक बेसिक को भी पत्र भेजा गया है। वाराणसी मंडल के चार जिलों में करीब दो हजार शिक्षक योजना के दायरे में आएंगे, जिसमें करीब 650 शिक्षक अकेले बनारस के हैं। इस संबंध में बेसिक शिक्षा विभाग के सहायक निदेशक हेमंत राव की तरफ से सभी बीएसए को पत्र जारी किया गया है।
वर्ष 2016 के बाद से इन शिक्षकों का प्रमोशन नहीं हो सका है, ऐसे में यह आदेश इन शिक्षकों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर लेकर आया है। बता दें कि पूर्व अदालती मुकदमों के कारण वरिष्ठता निर्धारण में कई जटिलताएं थीं, लेकिन नए निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि फैसलों और नियमावली को ध्यान में रखकर ही सूची बनाई जाएगी।
प्रमोशन नहीं होने से शिक्षक एक ही पद पर सेवानिवृत्त होने को विवश
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलामंत्री डा. शैलेन्द्र विक्रम सिंह कहते हैं कि एक दशक के बाद से परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया ठप पड़ी थी, जिससे हजारों शिक्षकों में निराशा थी। अब शिक्षकों की वर्षों पुरानी मांग पूरी होने की दिशा में बड़ा कदम उठा है। प्रमोशन नहीं होने के कारण शिक्षक एक ही पद पर सेवानिवृत्त होने को विवश थे। वरिष्ठता सूची बनने से सहायक अध्यापकों के प्रधानाध्यापक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों के पदोन्नति का मार्ग प्रशस्त होगा, जिससे उनके मनोबल में वृद्धि होगी।

