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कौन हैं ‘कृष्ण मोहन’ जिन्हें राम मंदिर ट्रस्ट का बनाया गया कार्यवाहक महासचिव? चंपत राय वाली मिली जिम्मेदारी

  • श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट क्षेत्र की आज हुई अहम बैठक में बड़ा फैसला लेते हुए कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव बनाया गया है

अयोध्या : श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में आज बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव बनाया गया है। अब कृष्ण मोहन कार्यवाहक महासचिव के रूप में ट्रस्ट के प्रशासनिक और संगठनात्मक कार्यों का संचालन करेंगे।

कृष्ण मोहन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ पदाधिकारी और भारतीय वन सेवा (IFS) के पूर्व अधिकारी रह चुके हैं। 73 वर्षीय कृष्ण मोहन मूल रूप से उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के रहने वाले हैं। प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक कार्यों में उनकी लंबी पारी को देखते हुए उन्हें राम मंदिर ट्रस्ट की नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।

संघ में क्षेत्र प्रभारी की निभा रहे भूमिका

कृष्ण मोहन वर्तमान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्र संघ चालक (क्षेत्र प्रभारी) हैं। संघ में लंबे समय तक विभिन्न दायित्व निभाने के कारण उन्हें संगठन और प्रबंधन का व्यापक अनुभव हासिल है। यही अनुभव अब राम मंदिर ट्रस्ट के संचालन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

पिछले साल बने थे ट्रस्ट के सदस्य

कृष्ण मोहन को साल 2025 में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया था। उन्होंने ट्रस्ट में कामेश्वर चौपाल का स्थान लिया था। ट्रस्ट में शामिल होने के बाद से ही वे मंदिर निर्माण, प्रशासनिक व्यवस्थाओं और विभिन्न गतिविधियों से जुड़े कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।

2012 में IFS से हुए रिटायर

कृष्ण मोहन अपनी शुरुआती शिक्षा के बाद लखनऊ विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की। अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत उन्होंने भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग में की, जहां उन्होंने कुछ सालों तक सेवाएं दीं। इसके बाद उन्होंने भारतीय वन सेवा (IFS) जिम्मेदारियां निभाईं। साल 2012 में भारतीय वन सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद कृष्ण मोहन पूरी तरह सामाजिक और संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय हो गए।

अब संभालेंगे ट्रस्ट का संचालन

चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद ट्रस्ट के दैनिक प्रशासन, विभिन्न परियोजनाओं के समन्वय, बैठकों के संचालन और मंदिर प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी अब कृष्ण मोहन के पास होगी। साथ ही राम मंदिर में चढ़ने वाला चढ़ावा और चंदे में पारदर्शिता लाने पर खासा जोर रहेगा। मंदिर में दान के रूप दिए जाने वाले चंदे की कड़ाई से निगरानी करने की जिम्मेदारी भी इन्हीं के पास रहने वाली है। साथ ही श्रद्धालुओं की संख्या और मंदिर परिसर के विकास कार्यों को देखते हुए उनकी भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है।

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