- बलदेव, राया और मांट क्षेत्र में हजारों बीघा धान संकट में, जलशक्ति मंत्री तक शिकायत के बावजूद नहीं निकला समाधान
दैनिक उजाला, मथुरा : जनपद के बलदेव, राया और मांट क्षेत्र में नहरों और रजवाहों में पिछले 25 दिनों से पानी नहीं आने के कारण धान की फसल सूखने लगी है। खेतों में दरारें पड़ चुकी हैं और रोपाई के बाद तैयार हो रही फसल अब पानी के अभाव में पीली पड़कर खराब होने लगी है। लगातार शिकायतों के बावजूद सिंचाई व्यवस्था बहाल न होने से किसानों में भारी आक्रोश है। किसानों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से तत्काल नहरों और रजवाहों में पानी छोड़े जाने की मांग की है।
किसानों का कहना है कि धान की फसल इस समय सबसे महत्वपूर्ण अवस्था में है। यदि अगले कुछ दिनों में सिंचाई के लिए पानी नहीं मिला तो हजारों किसानों की मेहनत और लाखों रुपये की लागत बर्बाद हो जाएगी। खेतों की स्थिति ऐसी हो गई है कि मिट्टी में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं और पौधे सूखने लगे हैं।
भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के प्रदेश प्रवक्ता एवं आगरा मंडल अध्यक्ष रामवीर सिंह तोमर ने कहा कि नहरों और राजवाहों में पानी न आने से किसानों की स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। कई बार सिंचाई विभाग के अधिकारियों से शिकायत की गई और मामला जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह तक भी पहुंचाया गया, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यदि शीघ्र पानी नहीं छोड़ा गया तो किसान बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने की बात करती है, लेकिन समय पर सिंचाई का पानी तक उपलब्ध नहीं करा पा रही है।

समाजवादी पार्टी सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय सचिव पं. गौरव पाण्डेय ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि किसानों की सबसे बड़ी जरूरत सिंचाई का पानी है, लेकिन सरकार इस गंभीर समस्या को भी नजरअंदाज कर रही है। धान की फसल सूख रही है और किसान लगातार अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के चक्कर काट रहे हैं, फिर भी व्यवस्था नहीं सुधर रही। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने तुरंत नहरों और रजवाहों में पानी नहीं छोड़ा तो हजारों किसानों की फसल बर्बाद होने की जिम्मेदारी सरकार की होगी।

किसानों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि बलदेव, राया, मांट सहित प्रभावित क्षेत्रों की नहरों और रजवाहों में तत्काल पानी छोड़े जाने के निर्देश दिए जाएं, ताकि धान की फसल को बचाया जा सके। किसानों का कहना है कि अभी भी समय रहते सिंचाई की व्यवस्था हो जाए तो फसल को बचाया जा सकता है, अन्यथा इस वर्ष धान उत्पादन पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
इस बीच निचली मांट ब्रांच गंग नहर के अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) यू.के. सोनकर ने बताया कि शनिवार सुबह हरिद्वार से पानी छोड़ दिया गया है। यह पानी मथुरा जनपद के क्षेत्र में पहुंचने में लगभग 4 से 5 दिन का समय लेगा। इसके बाद नहरों और रजवाहों में पानी छोड़ा जाएगा, जिससे धान सहित अन्य फसलों को राहत मिलने की उम्मीद है।

