वॉशिंगटन डीसी : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि वो फिलहाल रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार नहीं कर रहें है। ट्रम्प ने कहा, ’मुझे इसके (टैरिफ के) बारे में दो या तीन हफ्ते में सोचना पड़ सकता है, लेकिन हमें इसके बारे में तुरंत सोचने की जरूरत नहीं है।’
फॉक्स न्यूज के साथ इंटरव्यू में ट्रम्प ने कहा-

भारत के रूसी तेल व्यापार पर 25% एक्स्ट्रा टैरिफ लगने से रूस ने एक बड़ा तेल ग्राहक खो दिया है। चीन पर इसी तरह के टैरिफ रूस के लिए विनाशकारी होंगे। अगर मुझे ऐसा करना पड़ा, तो मैं करूंगा, लेकिन शायद मुझे ऐसा करने की जरूरत नहीं होगी
दरअसल, ट्रम्प ने भारत पर रूस से तेल और हथियार खरीदने के लिए 6 अगस्त को 25% एक्स्ट्रा टैरिफ लगाया था। 27 अगस्त से लागू होगा। इसके बाद भारत पर कुल टैरिफ 50% हो जाएगा।
हालांकि, भारत साफ कर चुका है कि ट्रम्प की धमकियों के बाद रूसी तेल खरीदारी में कोई रोक नहीं लगी है। वही, ट्रम्प-पुतिन ने अलास्का में शुक्रवार (15 अगस्त) देर रात यूक्रेन जंग पर बातचीत की। भारत ने इस कदम का स्वागत किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा- दुनिया रूस-यूक्रेन जंग खत्म होते देखना चाहती है।
ट्रम्प-पुतिन के बीच कोई डील नहीं हुई
पुतिन और ट्रम्प ने शुक्रवार देर रात अलास्का में मुलाकात की। उनके बीच यूक्रेन जंग खत्म करने पर करीब 3 घंटे मीटिंग हुई। इसके बाद दोनों नेताओं ने सिर्फ 12 मिनट की जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने पत्रकारों के किसी सवाल का जवाब नहीं दिया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रम्प ने कहा कि हमारी बैठक बहुत सकारात्मक रही। हमने कई बिंदुओं पर सहमति जताई, लेकिन कोई डील नहीं हुई। कोई समझौता तभी होगा, जब वह अंतिम रूप लेगा।
ट्रम्प ने इस बैठक को 10 में से 10 अंक दिए। वहीं, पुतिन ने कहा कि उनके लिए रूस की सुरक्षा सबसे जरूरी है। उन्होंने अगली मीटिंग मॉस्को में करने का सुझाव दिया। अपनी बात कहने के बाद दोनों नेता मंच से तुरंत चले गए।

रूसी राष्ट्रपति पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने शुक्रवार को अलास्का के एंकरेज में मुलाकात की।
भारत ने ट्रम्प-पुतिन के बीच बातचीत का स्वागत किया
भारत ने शनिवार को ट्रम्प और पुतिन के बीच अलास्का में बैठक का स्वागत किया। इसे सराहनीय कदम बताया।
विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर यूक्रेन संघर्ष को सुलझाने के लिए कूटनीति के महत्व पर भी जोर दिया। बयान में आगे कहा गया, ‘भारत समिट में हुई प्रगति की सराहना करता है। आगे का रास्ता बातचीत और कूटनीति से ही निकल सकता है। दुनिया यूक्रेन में संघर्ष का जल्द अंत देखना चाहती है।’

