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Sat. Feb 14th, 2026

चीन भारत को उर्वरक, रेयर अर्थ मटेरियल और सुरंग खोदने वाली मशीनों की आपूर्ति के लिए तैयार

  • चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने विदेश मंत्री एस जयशंकर को आश्वासन दिया कि उनका देश भारत को उर्वरकों, दुर्लभ मृदा खनिजों और सुरंग खोदने वाली मशीनों की अति आवश्यक आपूर्ति फिर से शुरू करेगा

नई दिल्ली : भारत और चीन के संबंधों में सकारात्मक बदलाव का दौर शुरू हो गया है और अब इसके संकेत भी नजर आने लगे हैं। बीजिंग ने भारत को उर्वरक, रेयर अर्थ मटेरियल  और टनल बोरिंग मशीनों की आपूर्ति बहाल करने का आश्वासन दिया है। चीनी विदेश मंत्री वांग यी 2 दिवसीय भारत दौरे पर हैं और इसी दौरान भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात के दौरान उन्होंने यह आश्वासन दिया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पिछले महीने अपनी चीन यात्रा के दौरान विदेश मंत्री वांग यी के साथ यूरिया, एनपीके और डीएपी, दुर्लभ मृदा खनिजों और टीबीएम की आपूर्ति का मुद्दा उठाया था।

‘तनाव कम करने की प्रक्रिया पर है जोर’

चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ मुलाकात के दौरान एस जयशंकर ने कहा कि भारत और चीन को संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए एक स्पष्ट और रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाया चाहिए जो आपसी सम्मान, संवेदनशीलता और परस्पर हितों पर आधारित हो। वांग के साथ बैठक में विदेश मंत्री ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव कम करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। इस क्षेत्र में दोनों देशों की सेनाओं के बीच चार साल से अधिक समय से गतिरोध चल रहा है। 

जयशंकर ने साफ किया भारत का रुख

विदेश मंत्री जयशंकर ने वार्ता के दौरान स्पष्ट किया कि ताइवान पर भारत के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है और दुनिया की तरह भारत भी आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों के लिए राजनयिक उपस्थिति बनाए रखेगा। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि वाशिंगटन की मौजूदा नीतियों के कारण उन्हें करीब आने की जरूरत है।

क्यों अहम है वांग यी का भारत दौरा?

चीनी विदेश मंत्री वांग यी यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन की प्रस्तावित यात्रा से कुछ दिन पहले हो रही है। साल 2020 में गलवान घाटी में संघर्ष के बाद भारत-चीन के रिश्तों में गंभीर तनाव आ गया था। इसके मद्देनजर चीनी विदेश मंत्री की यात्रा को दोनों पड़ोसी देशों द्वारा संबंधों के सुधारने के प्रयासों के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। 

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