मथुरा : मथुरा के प्रतिष्ठित के.एम. मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने चिकित्सा क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल के वरिष्ठ ऑर्थाेपेडिक सर्जन और विभागाध्यक्ष डॉ. हर्षित जैन के मार्गदर्शन में डॉक्टरों की टीम ने एक 76 वर्षीय बुजुर्ग का अत्यंत जटिल टोटल नी रिप्लेसमेंट (घुटना प्रत्यारोपण) ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा कर उन्हें घुटने के असहनीय दर्द से मुक्ति दिलाई है।
केएम विश्वविद्यालय के कुलाधिपति किशन चौधरी, कुलपति डा. एनसी प्रजापति, प्रो कुलपति डा. शरद अग्रवाल, एडीशन मेडीकल सुप्रीटेंट डा. नमित गौतम ने हड्डी रोग विभाग की चिकित्सकीय टीम को सफल ऑपरेशन के लिए बधाई दी है।
राधाकुण्ड कस्बे के राधानगर कॉलोनी निवासी बुजुर्ग सुनील दास पिछले छह वर्षों से घुटनों के गंभीर और असहनीय दर्द से पीड़ित थे। अधिक उम्र और घुटने की गतिशीलता खत्म होने के कारण उनका जीवन पूरी तरह बेपटरी हो चुका था। दर्द के चलते उनका चलना-फिरना तो दूर, दैनिक क्रियाएं (शौच आदि) करना भी दूभर हो गया था। वे गत 18 मई 2026 को अस्पताल की ओपीडी में परामर्श के लिए पहुंचे थे। परीक्षण के दौरान अस्थि रोग विशेषज्ञ डा. हर्षित जैन ने पाया कि मरीज का घुटना पूरी तरह खराब हो चुका है, जिसके बाद उन्होंने तुरंत सर्जरी की सलाह दी। वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. हर्षित जैन के कुशल मार्गदर्शन में असिटेंट प्रोफेसर डॉ. रामधन, डॉ. आशीष शर्मा, डॉ. भव्य ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। जिसमें डॉ. आशीष गुप्ता, डॉ. कुलदीप गुप्ता और डॉ. सुरभि सिंह ने अपनी विशेषज्ञता से मरीज को सुरक्षित एनेस्थीसिया दिया। ऑपरेशन को सफल बनाने में ओटी तकनीशियन नवीन, राहुल और बबलू का भी विशेष सहयोग रहा।
हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. हर्षित जैन ने बताया कि “टोटल नी आर्थ्राेप्लास्टी एक उन्नत चिकित्सा प्रक्रिया है। इसमें घुटने के पूरी तरह खराब हो चुके जोड़ को हटाकर कृत्रिम इम्प्लांट लगाया जाता है। यह ऑस्टियोआर्थराइटिस या जोड़ों के गंभीर दर्द से जूझ रहे मरीजों के लिए रामबाण है। सर्जरी के बाद मरीज को दर्द से स्थायी राहत मिलती है और वे सामान्य जीवन में लौट आते हैं।”
हड्डी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रामधन ने बताया कि 76 वर्षीय बुजुर्ग सुनील दास के घुटने में वैल्गस डिफॉर्मिटी “बाह्य कोणीय विकृति” एक हड्डियों की विकृति है जिसमें शरीर का कोई जोड़ या हड्डी शरीर की मध्य रेखा (midline) से बाहर की ओर झुक झुक जाता है, जिसका आपरेशन ही एक विकल्प होता है, ऐसी डिफाॅर्मिटी का आपरेशन दिल्ली, जयपुर, फरीदाबाद होता है, लेकिन अब वैल्गस डिफॉर्मिटी उन्नत चिकित्सा सुविधा मथुरा के के.एम. अस्पताल में भी पूरी तरह उपलब्ध हो चुकी है। इसके शुरू होने से अब क्षेत्र के पीड़ित मरीजों को इलाज के लिए अपने घर से दूर बड़े शहरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और वे यहीं स्थानीय स्तर पर अपना विश्वस्तरीय इलाज करा सकेंगे।
बुजुर्ग सुनील दास का यह पूरा इलाज आयुष्मान भारत योजना के तहत के.एम. अस्पताल में पूरी तरह निःशुल्क (फ्री) किया गया है। सफल ऑपरेशन के बाद मरीज के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों की टीम का आभार व्यक्त किया है। डॉक्टरों का कहना है कि मरीज अब तेजी से रिकवर कर रहे हैं और जल्द ही बिना किसी दर्द के सामान्य रूप से चल-फिर सकेंगे।

