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अमरनाथ गुफा में शिवलिंग 90% गायब, ऊंचाई एक फीट बची: 3 दिन में 56000 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए; यह आंकड़ा पिछले साल से 18% ज्यादा

श्रीनगर : अमरनाथ में बनने वाले पवित्र शिवलिंग का आकार एक फीट रह गया है। 23 मई को BSF के जवानों ने जो तस्वीर जारी की थी, उसमें शिवलिंग का आकार करीब 7 फीट था।

29 जून को पहली पूजा के दिन भी हिमलिंग की ऊंचाई 5 फीट से ज्यादा थी। 6 जुलाई को सामने आई तस्वीर में हिमलिंग लगभग 90% गायब हो चुका है।

57 दिन चलने वाली यात्रा 3 जुलाई से शुरू हुई थी। पिछले 3 दिनों में 56 हजार से ज्यादा तीर्थयात्री बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। यह आंकड़ा पिछले साल से करीब 18.6% ज्यादा रहा। 2025 में पहले तीन दिन में 47,972 श्रद्धालु पहुंचे थे।

48 किमी लंबे नुनवान-पहलगाम रूट और 14 किमी वाले छोटे लेकिन कठिन बालटाल रूट से लगातार यात्री दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। यात्रा 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन खत्म होगी।

जम्मू-कश्मीर में चल रही सालाना 'अमरनाथ यात्रा' के रूट पर जवान पहरा दे रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर में चल रही सालाना ‘अमरनाथ यात्रा’ के रूट पर जवान पहरा दे रहे हैं।

पहलगाम रूट पर जम्मू-कश्मीर पुलिस की माउंटेन रेस्क्यू टीम (MRT) के अधिकारी एक तीर्थयात्री को ऑक्सीजन देते हुए।

पहलगाम रूट पर जम्मू-कश्मीर पुलिस की माउंटेन रेस्क्यू टीम (MRT) के अधिकारी एक तीर्थयात्री को ऑक्सीजन देते हुए।

बालटाल रूट पर बेस कैंप से पोर्टर एक तीर्थयात्री को पालकी में ले जा रहे हैं। यहां से घोड़े और पोनी भी मिलते हैं।

बालटाल रूट पर बेस कैंप से पोर्टर एक तीर्थयात्री को पालकी में ले जा रहे हैं। यहां से घोड़े और पोनी भी मिलते हैं।

9 जुलाई तक रजिस्ट्रेशन स्लॉट बुक, प्रशासन बोला- नए यात्री कुछ दिन रुकें

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने बिना रजिस्ट्रेशन करवाए अमरनाथ पहुंच रहे यात्रियों से कहा है कि वे अपनी यात्रा कुछ दिन के लिए टाल दें। प्रशासन के मुताबिक, 9 जुलाई तक सभी रजिस्ट्रेशन स्लॉट पूरी तरह भर चुके हैं।

ऐसे में अगर कोई यात्री बिना रजिस्ट्रेशन बालटाल या पहलगाम रूट से आगे बढ़ने की कोशिश करेगा तो उसे चेक पॉइंट्स पर रोक दिया जाएगा। उसे 9 जुलाई के बाद ही आगे बढ़ने दिया जाएगा।

अधिकारियों ने कहा कि रविवार से केवल रजिस्टर्ड यात्री ही कश्मीर की ओर जाने की अनुमति दी जाएगी। बिना रजिस्ट्रेशन वाले यात्रियों को चेक पोस्ट पर रोक दिया जाएगा। उन्हें 9 जुलाई के बाद ही आगे बढ़ने मिलेगा।

अमरनाथ के बाबा बर्फानी प्राकृतिक बनते हैं, तराशा नहीं जाता

अमरनाथ का हिम शिवलिंग किसी बर्फ के ब्लॉक को तराशकर नहीं बनाया जाता, बल्कि यह प्राकृतिक आइस स्टैलेग्माइट है। जैसे चूना-पत्थर की गुफाओं में जमीन से खनिज जमा होकर स्टैलेग्माइट बनते हैं, उसी तरह अमरनाथ गुफा में छत से टपकने वाला पानी जमकर बर्फ का शिवलिंग बनाता है। इसका आकार हर साल मौसम, तापमान और पानी की उपलब्धता के अनुसार अलग-अलग होता है। यही इसकी सबसे अनोखी विशेषता है।

शिवलिंग इसलिए तेजी से घट रहा है, क्योंकि गुफा में बढ़ती मानवीय और प्राकृतिक गतिविधियों से मौसम गर्म हो रहा है। ऊपर से टपकने वाला पानी पहले की तरह जम नहीं पा रहा है।

यात्रा के 2 रूट, एक 48km लंबा लेकिन सरल, दूसरा 14km का लेकिन कठिन चढ़ाई

अमरनाथ यात्रा दो रास्तों से की जाती है। पारंपरिक रास्ता 48 किलोमीटर लंबा नुनवान-पहलगाम से है। दूसरा रास्ता गांदरबल जिले में 14 किलोमीटर लंबे बालटाल से है। यात्रा 28 अगस्त को खत्म होगी।

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