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चंपत राय और अनिल मिश्रा नहीं तो अब कौन जारी करेगा राम मंदिर के VIP दर्शन पास? अब इन्हें मिली जिम्मेदारी

  • चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के पास से राम मंदिर के VIP दर्शन पास जारी करने का अधिकार जा चुका है
  • अभी सिर्फ दिनेंद्र दास के पास ही है VIP पास जारी करने का अधिकार
  • ट्रस्ट से हटने के बाद चंपत राय से छिना पास बनाने का अधिकार
  • पास बनाने में हेराफेरी से भी कमाए गए लाखों रुपये

अयोध्या के राम मंदिर के दर्शन के लिए VIP पास को लेकर बड़ा अपडेट आया है। दरअसल, VIP पास जारी करने का अधिकार अब महंत दिनेंद्र दास के पास आ गया है। दिनेंद्र दास की आईडी सिस्टम में एक्टिवेट की गई है। महंत दिनेंद्र दास के रिकमेंडेशन पर सुगम और विशिष्ट दर्शन पास जारी हो सकेंगे। हालांकि, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से छुट्टी के बाद चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव की आईडी डी-एक्टिवेट की जा चुकी है।

VIP दर्शन पास के लिए जरूरी होती है ट्रस्टी की सिफारिश

बता दें कि राम मंदिर में VIP दर्शन पास के लिए ट्रस्टी की सिफारिश जरूरी होती है। ऐसे में अब ये जिम्मेदारी महंत दिनेंद्र दास को दी गई है। गौरतलब है कि अयोध्या के राम मंदिर में दर्शन के लिए दो तरह के पास- सुगम दर्शन पास और विशिष्ट दर्शन पास यानी VIP पास हैं। इनको बनाने के लिए सभी ट्रस्टियों के नाम से आईडी को सिस्टम में जेनेरेट किया गया है। इन आईडी के माध्यम से ट्रस्टी, श्रद्धालुओं के लिए विशिष्ट दर्शन और सुगम दर्शन पास जारी करते हैं।

श्रद्धालुओं को पास देने में भी हेराफेरी का है आरोप

आरोप के मुताबिक, राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के आरोपी टिन्नू यादव इसी सिस्टम का लाभ उठाकर सैंकड़ों पास जारी करवा चुका था। अनिल मिश्रा और चंपत राय के करीबी भी वीआईपी पास जारी करवाने में हेराफेरी कर रहे थे। वहां से भी लाखों की कमाई की गई है।

आउटसोर्स कर्मचारियों के इस्तीफे के बावजूद आराम से चल रही गणना

वहीं, आउटसोर्स स्टाफ के इस्तीफे की खबर पर बैंक सोर्सेस का कहना है कि इन 8 लोगों की गिरफ्तारी के बाद कोई नई भर्ती नहीं हुई है। इसके बावजूद, चढ़ावे की गणना का काम आराम से चल रहा है क्योंकि अभी ज्यादा भीड़ नहीं है। दरअसल, आउटसोर्स स्टाफ की सैलरी कम होने के चलते वो मौका मिलते ही नौकरी छोड़ देते है।

नोटों को सीधा करने का था आउटसोर्स स्टाफ का काम

आउटसोर्स स्टाफ का काम नोटों को सीधा करके उन्हें व्यवस्थित तरीके से बस लगाना होता है। नोटों की गिनती सिर्फ बैंक के लोग करते हैं इसलिए कोई परेशानी नहीं हो रही है। आगामी 22 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में सभी व्यवस्थाओं पर चर्चा होनी है। आगे के काम सुचारू रूप से चल सके इसको लेकर बातचीत की जाएगी।

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