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Wed. Sep 23rd, 2026

बहू की सैलरी से 25% सास को मिलेगा:हाईकोर्ट ने बिजली निगम को दिए कटौती के आदेश; अनुकंपा नियुक्ति के बाद कर ली दूसरी शादी

जयपुर : पति की मौत के बाद अनुकंपा नियुक्ति पाने वाली पत्नी (बहू) की सैलरी से 25 प्रतिशत राशि सास के बैंक अकाउंट में जमा की जाए। राजस्थान हाईकोर्ट (जयपुर) के जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (AVVNL) को यह आदेश सास-ससुर की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।

साल 2018 में सास-ससुर ने याचिका लगाई थी। हालांकि सुनवाई के दौरान ससुर की मृत्यु हो गई थी। याचिका में कहा गया था कि उनका बेटा अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (AVVNL) में टेक्निकल हेल्पर के पद पर कार्यरत था। मार्च 2017 में उसकी मौत हो गई थी।

बेटे की मौत के बाद सास-ससुर का अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) मिलने पर बहू को अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। नौकरी के समय बहू ने परिवार के अन्य मेंबर्स की देखभाल और भरण पोषण का शपथ पत्र भी दिया था।

लेकिन नौकरी मिलने के कुछ समय बाद ही बहू ने घर (ससुराल) छोड़ दिया और दूसरी शादी कर ली। सास-ससुर को सहारा देना भी बंद कर दिया।

अनुकंपा नियुक्ति विशेषाधिकार नहीं

एडवोकेट रमित पारीक ने बताया- कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अनुकंपा नियुक्ति कोई व्यक्तिगत अधिकार या विशेषाधिकार नहीं है, बल्कि यह कल्याणकारी उपाय है।

कोर्ट ने माना कि परिवार का भरण-पोषण करने का शपथ पत्र ही इस नियुक्ति का मुख्य आधार था। इस योजना का लाभ उठाने के बाद उस दायित्व से पीछे हट जाना, अनुकंपा नियुक्ति योजना की मूल भावना और आत्मा का उल्लंघन है।

बहू ने कहा था- सास के दो अन्य बेटे, वो कर सकते हैं भरण-पोषण

बहू की ओर से दलील दी गई कि मैंने दुर्व्यवहार के कारण अपना ससुराल छोड़ा था। ससुर की मृत्यु हो गई है। वहीं सास का भरण-पोषण उनके अन्य दो बेटे भी कर सकते हैं। ऐसे में सैलरी का हिस्सा याचिकाकर्ता के साथ साझा करने और मृत पति के टर्मिनल बेनिफिट्स में हिस्सा देने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए।

बहू की ओर से यह भी दलील दी गई कि उन्हें जो वेतन मिल रहा है, वह उनके पति की सेवा के बदले मिली अनुकंपा नियुक्ति से प्राप्त रोजगार का परिणाम है। इसे उनके व्यक्तिगत वेतन के रूप में देखा जाना चाहिए।

टर्मिनल बेनिफिट्स दो हिस्सों में बांटने के निर्देश

दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने AVVNL को निर्देश दिए कि वह बहू के मासिक वेतन (मंथली सैलरी) में से 25 प्रतिशत की कटौती करे। यह राशि सास के बैंक खाते में सीधे जमा करे। यह व्यवस्था सास के जीवित रहने तक जारी रहेगी।

वहीं दिवंगत कर्मचारी के सभी टर्मिनल बेनिफिट्स (रिटायरमेंट) लाभों को 30 दिनों में जारी किया जाए। इसे भी सास और बहू के बीच बराबर बांटा जाए।

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