- वृंदावन में बिना रजिस्ट्रेशन चल रहा था गुरुकुल:संचालक ने टैंक की सफाई के लिए उतारा, 4 छात्रों की मौत; हादसे के बाद बैनर फाड़ा
मथुरा : वृंदावन में मंगलवार रात गुरुकुल में पढ़ने वाले 4 छात्रों की टैंक की सफाई के दौरान मौत हो गई थी, जबकि एक की हालत गंभीर है। यह गुरुकुल बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित हो रहा था। छात्रों की पढ़ाई का फॉर्म दूसरे स्कूल से भरवाया जाता था।
आरोप है कि छात्रों को मोबाइल रखने की अनुमति नहीं थी। वे परिजनों से संचालक के फोन से ही बात करते थे। छात्रों से खाना बनवाने और साफ-सफाई का काम भी कराया जाता था। हादसे के बाद संचालक ने इमारत के बाहर लगा गुरुकुल का बैनर भी फाड़ दिया।
पुलिस ने संचालक आशीष और उसके एक साथी को हिरासत में लिया है। परिजन अपने बच्चों को घर ले जा रहे हैं। परिजनों की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई होगी। हादसा महर्षि पाणिनि संस्कृत गुरुकुलम में रात 10 बजे हुआ।

हादसे के गुरुकुल में पढ़ने वाले बच्चे घबराए हुए हैं। फोन पर अपने परिजनों से बातचीत कर रहे हैं।

परिजन गुरुकुल पहुंचकर उन्हें घर ले जा रहे हैं।
परिजन अपने बच्चों को गुरुकुल से घर ले जा रहे
वृंदावन के रहने वाले भरत शास्त्री ने कहा- गुरुकुल में पढ़ने वाले बच्चे मेरे साले के हैं। घटना की जानकारी मुझे सुबह हुई थी, जिसके बाद मैं गुरुकुल पहुंचा। हादसे के बाद बच्चे घबराए हुए थे, इसलिए अब उन्हें अपने घर लेकर जा रहा हूं।
घटना के बाद सभी अभिभावक धीरे-धीरे यहां पहुंच रहे हैं और अपने-अपने बच्चों को घर ले जा रहे हैं। प्रशासन की कार्रवाई पूरी होने के बाद अब हम बच्चों को लेकर घर जा रहे हैं।
बिना सेफ्टी टैंक में उतरे 5 छात्र
गुरुकुल की बिल्डिंग के पिछले हिस्से में करीब 3 फीट लंबा, 3 फीट चौड़ा और 12 फीट गहरा पानी का टैंक बना है। मंगलवार देर शाम टैंक से बदबू आने और पानी ओवरफ्लो होने पर संचालक ने 5 छात्रों को उसकी सफाई के लिए लगाया।
सबसे पहले मनु कटारे टैंक में उतरा। अंदर जाते ही वह बेहोश हो गया। उसे बचाने के लिए आर्यन, देवांश, विशु और रुद्र भी टैंक में उतर गए। टैंक में बनी गैस की वजह से ये चारों भी बेहोश हो गए। पांचों छात्रों को किसी तरह बाहर निकालकर अस्पताल ले जाया गया।
वहां डॉक्टरों ने मनु कटारे (20 साल), देवांश (17 साल), विशु (18 साल), और आर्यन (18 साल) को मृत घोषित कर दिया। रुद्राक्ष (18) की स्थिति गंभीर बनी हुई है। मनु और देवांश मध्य प्रदेश के जबलपुर और विदिशा के रहने वाले थे, जबकि आर्यन कौशांबी व विशु मेरठ का निवासी था।
आरोप है कि छात्रों को टैंक में उतारते समय किसी तरह के सेफ्टी उपकरण का इस्तेमाल नहीं किया गया।

हादसे के बाद स्कूल संचालक से पुलिस अफसरों ने पूछताछ की।
200 छात्र पंजीकृत, 100 के रहने की व्यवस्था
डीएम चंद्र प्रकाश सिंह ने बताया- गुरुकुल में करीब 200 छात्र हैं। इनमें से करीब 100 छात्रों के रहने की व्यवस्था इसी 320 गज के भवन में की गई थी। छात्र मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार समेत अलग-अलग राज्यों से यहां संस्कृत पढ़ने आए थे।
यहां छात्रों को वेद, कर्मकांड और पूजन कराने की शिक्षा दी जाती है। भवन को आशीष गुरुजी ने पन्ना निवासी सुखेंद्र मिश्रा से किराए पर लिया था।

गुरुकुल बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहा था।
बिना रजिस्ट्रेशन चल रहा था गुरुकुल
डीएम ने बताया कि गुरुकुल का संचालन बिना रजिस्ट्रेशन के किया जा रहा था। आशीष छात्रों को यहां रखता था, जबकि उनकी पढ़ाई का फॉर्म दूसरे स्कूल से भरवाया जाता था।
छात्रों को मोबाइल रखने की अनुमति नहीं थी। परिजनों से भी वे संचालक के फोन से ही बात करते थे। गुरुकुल में छात्रों को अलग-अलग काम भी दिए गए थे। किसी से खाना बनवाया जाता था तो किसी से साफ-सफाई कराई जाती थी।

संचालक आशीष को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।
हादसे के बाद बैनर फाड़ने का आरोप
हादसे के बाद संचालक ने इमारत के बाहर लगा गुरुकुल का नाम वाला बैनर फाड़ दिया। आरोप है कि उसने कुछ देर तक घटना को दबाने की कोशिश की। छात्रों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी।
पुलिस के पहुंचने के बाद संचालक आशीष और उसके एक साथी को हिरासत में ले लिया गया। देर रात डीएम चंद्र प्रकाश सिंह और एसएसपी श्लोक कुमार समेत अन्य अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर छात्रों से जानकारी ली।
एसएसपी श्लोक कुमार ने बताया कि हादसे के कारण और इसमें किसकी लापरवाही रही, इसकी जांच की जा रही है। दो लोगों को हिरासत में लिया गया है। परिजनों की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

