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मथुरा में 7 दिन से 200 बच्चों और 40 निराश्रित महिलाओं के आश्रय सदन में बिजली संकट, शिकायतों के बाद भी नहीं जागे एक्सईएन 11 केवी

  • ऑनलाइन और लिखित शिकायत के बावजूद समस्या जस की तस, लाइनमैन ने जांच कर अधिकारी को दी जानकारी; एक्सईएन ने फोन तक नहीं उठाया, एसई सिटी की निगरानी पर भी सवाल

दैनिक उजाला, वृंदावन : छटीकरा रोड स्थित मां धाम महिला आश्रय सदन में पिछले सात दिनों से बिजली आपूर्ति पूरी तरह सुचारु नहीं होने से यहां रहने वाले करीब 200 बच्चों और 40 निराश्रित महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आश्रम में आसपास के लेबर क्लास परिवारों के बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं, जबकि बड़ी संख्या में निराश्रित महिलाएं भी रहती हैं। ऐसे संस्थान में लगातार एक सप्ताह से विद्युत समस्या बने रहने के बावजूद समाधान नहीं होने से बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

आश्रम की ओर से विद्युत विभाग को इस समस्या की ऑनलाइन शिकायत करने के साथ ही लिखित शिकायत भी दी जा चुकी है। शिकायत में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि छटीकरा बिजलीघर से संबंधित क्षेत्र में ट्रांसफार्मर से आश्रम को पूरी विद्युत आपूर्ति नहीं मिल रही है। शिकायतकर्ता ने विभाग से आश्रम में रहने वाले बच्चों और महिलाओं की स्थिति को देखते हुए समस्या का तत्काल समाधान कराने का अनुरोध किया है, लेकिन सात दिन बीत जाने के बाद भी बिजली व्यवस्था सामान्य नहीं हो सकी है।

लाइनमैन ने मौके पर जांच की, अधिकारी को भी दी सूचना

मामले में संबंधित लाइनमैन गोविंद ने अधिकारियों के निर्देश पर मौके पर पहुंचकर स्थिति की जांच की थी। शिकायतकर्ता मंजीत के अनुसार लाइनमैन ने समस्या की जानकारी संबंधित अधिकारी को भी दे दी थी। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं होना विभागीय स्तर पर शिकायतों की मॉनिटरिंग को लेकर सवाल खड़े कर रहा है।

क्षेत्र में संबंधित जेई छटीकरा, 11 केवी तकनीकी विभाग के एक्सईएन तथा लाइनमैन कोमल और गोविंद के स्तर पर समस्या से जुड़े होने के बावजूद आश्रम को पूरी बिजली नहीं मिल पा रही है। ऐसे में सवाल यह है कि जब फील्ड कर्मचारी मौके की स्थिति देखकर अधिकारियों को जानकारी दे चुका है तो उसके बाद कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

एक्सईएन अनिल पाल से फोन पर संपर्क का प्रयास, नहीं उठा फोन

आश्रम की ओर से समस्या के समाधान के लिए 11 केवी तकनीकी विभाग के एक्सईएन अनिल पाल से फोन पर संपर्क करने का भी प्रयास किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि एक्सईएन ने एक बार भी फोन अटेंड नहीं किया। ऐसे में बिजली समस्या से परेशान उपभोक्ता के सामने बड़ा सवाल खड़ा है कि आखिर वह अपनी समस्या लेकर जिम्मेदार अधिकारी तक पहुंचे तो कैसे पहुंचे?

ऑनलाइन शिकायत और लिखित शिकायत के बाद भी एसई तक मामला क्यों नहीं पहुंचा?

मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि शिकायतकर्ता द्वारा समस्या को लेकर ऑनलाइन शिकायत करने के साथ ही लिखित शिकायत भी की जा चुकी है। इसके बावजूद सात दिन से बिजली आपूर्ति सुचारु नहीं हो सकी। ऐसे में एसई स्तर की निगरानी और शिकायतों के निस्तारण की व्यवस्था पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।

एसई और एक्सईएन जैसे अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल अधीनस्थ अधिकारियों को निर्देश देने तक सीमित नहीं है, बल्कि गंभीर शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण हो रहा है या नहीं, इसकी निगरानी करना भी उनकी जिम्मेदारी है। खासकर जब मामला ऐसे आश्रय सदन का हो, जहां करीब 200 बच्चे और 40 निराश्रित महिलाएं रह रही हों, तब विभाग से संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा और बढ़ जाती है।

सात दिन से बिजली संकट, आखिर किसका इंतजार कर रहा विभाग?

एक सप्ताह से विद्युत आपूर्ति की समस्या झेल रहे आश्रम के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर समस्या के समाधान के लिए विभाग किसका इंतजार कर रहा है? जब शिकायत हो चुकी, लिखित सूचना दी जा चुकी, ऑनलाइन शिकायत दर्ज हो चुकी और लाइनमैन मौके पर जाकर जांच भी कर चुका, तो फिर समस्या का समाधान क्यों नहीं हुआ?

बिजली विभाग उपभोक्ताओं की समस्याओं के समयबद्ध निस्तारण का दावा करता है, लेकिन मां धाम महिला आश्रय सदन का यह मामला उन दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़ा कर रहा है। यदि सात दिनों तक बच्चों और निराश्रित महिलाओं के आश्रय सदन की बिजली समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है, तो सामान्य उपभोक्ताओं की शिकायतों के निस्तारण की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।

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