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Wed. May 6th, 2026

बंगाल में भाजपा सरकार,बांग्लादेश को लोगों की वापसी का डर:बांग्लादेशी मंत्री बोले- उम्मीद है जबरन नहीं भेजा जाएगा, बॉर्डर फोर्स अलर्ट पर

ढाका : पश्चिम बंगाल चुनाव में BJP की जीत के बाद बांग्लादेश सरकार को आशंका है कि लोगों को जबरन भारत से निकाला जा सकता है। अब इसे लेकर बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने बयान जारी किया है। उन्होंने कहा उम्मीद है कि भारत से लोगों को जबरन सीमा पार भेजने यानी ‘पुशबैक’ की घटनाएं नहीं बढ़ेंगी।

सलाहुद्दीन अहमद ने कहा कि वे नहीं चाहते कि किसी को अवैध प्रवासी बताकर भारत से बांग्लादेश की तरफ धकेला जाए। इसी के मद्देनजर बांग्लादेश की बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स को अलर्ट रहने के लिए कहा गया है।

इससे पहले बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने भी कहा था कि अगर ऐसे मामले होते हैं, तो बांग्लादेश कार्रवाई करेगा।

पुशबैक का मतलब किसी व्यक्ति को जबरन सीमा पार भेज देना। पिछले कुछ सालों में भारत और बांग्लादेश की सीमा पर ऐसे मामले सामने आते रहे हैं। दरअसल बंगाल चुनाव के दौरान BJP ने ममता बनर्जी की सरकार पर आरोप लगाया था उसने बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासियों को शरण दी है।

बांग्लादेश की सत्ताधारी पार्टी के नेता ने BJP को बधाई दी

उधर बांग्लादेश की सत्ताधारी पार्टी BNP के सूचना सचिव अजीजुल बारी हेलाल ने BJP को जीत की बधाई दी और कहा कि इससे भारत-बांग्लादेश संबंध मजबूत हो सकते हैं।

उन्होंने ममता बनर्जी सरकार पर तीस्ता जल बंटवारे समझौते में देरी करने का आरोप लगाया और कहा कि वह इसमें सबसे बड़ी रुकावट थी। उन्होंने दावा किया कि यह समझौता बांग्लादेश सरकार और मोदी सरकार दोनों ही चाहते थे।

हेलाल ने उम्मीद जताई कि सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बनी सरकार भारत और बांग्लादेश के रिश्तों को बेहतर बनाएगी और तीस्ता समझौते को आगे बढ़ाने में मदद करेगी।

उन्होंने कहा कि भारत के राज्यों में बांग्लादेश के साथ सबसे लंबी सीमा पश्चिम बंगाल की ही लगती है। इसलिए वहां की राजनीति का असर सीधे दोनों के संबंधों पर पड़ता है। वहां सत्ता बदलना दोनों देशों के लिए अच्छा है। इससे दोनों देशों के बीच सीमा मुद्दों पर भी सुधार हो सकता है।

तीस्ता नदी का 50% पानी चाहता है बांग्लादेश

तीस्ता नदी हिमालय के पाहुनरी ग्लेशियर से निकलती है। यह सिक्किम से पश्चिम बंगाल होते हुए बांग्लादेश जाती है और बाद में ब्रह्मपुत्र में मिल जाती है। यह नदी कुल 414 किलोमीटर का रास्ता तय करती है। इस नदी से बांग्लादेश के 2 करोड़ और भारत के 1 करोड़ लोगों का जीवनयापन जुड़ा है।

इस लंबी यात्रा के दौरान तीस्ता नदी की 83% यात्रा भारत में और 17% यात्रा बांग्लादेश में होती है। भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी के पानी के बंटवारे को लेकर कई सालों से विवाद है।

बांग्लादेश तीस्ता के 50 फीसदी पानी पर अधिकार चाहता है। जबकि भारत खुद 55% पानी चाहता है। जानकारों के मुताबिक अगर तीस्ता नदी जल समझौता होता है तो पश्चिम बंगाल नदी के पानी का मनमुताबिक इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। यही वजह है कि ममता बनर्जी इसे टालती रहीं।

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