- जीएलए में माइक्रोसॉफ्ट, जेपी मॉर्गन, एक्सेंचर, पीडब्लूसी सहित अग्रणी कंपनियों में कार्यरत विशेषज्ञों ने दिया मार्गदर्शन
दैनिक उजाला, मथुरा : जीएलए विश्वविद्यालय के कंप्यूटर इंजीनियरिंग एवं एप्लीकेशंस विभाग द्वारा एलुमनाई इंटरैक्शन 2026 का सफल आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न अग्रणी कंपनियों में कार्यरत एलुमनाई एवं उद्योग विशेषज्ञों ने भाग लेकर छात्रों को उभरती तकनीकी दुनिया के लिए तैयार होने के महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
कार्यक्रम के अंतर्गत क्लाउड कंप्यूटिंग एवं डेवऑप्स, फुल स्टैक डेवलपमेंट, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सिक्योरिटी तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषयों पर आधारित पाँच सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों के माध्यम से छात्रों को वर्तमान उद्योग प्रवृत्तियों, आवश्यक कौशलों तथा कंपनियों की अपेक्षाओं की गहन जानकारी प्राप्त हुई।
क्लाउड कंप्यूटिंग एवं डेवऑप्स सत्र में बांके शर्मा (प्रिंसिपल इंजीनियरिंग मैनेजर, माइक्रोसॉफ्ट) ने मजबूत तकनीकी नींव, निरंतर सीखने की प्रवृत्ति और समस्या-समाधान क्षमता को सफलता की कुंजी बताया। वहीं भूपेश शर्मा (सॉल्यूशंस आर्किटेक्ट, एचसीएल टेक्नोलॉजीज) ने स्केलेबल समाधान विकसित करने के लिए व्यावहारिक ज्ञान और वास्तविक अनुभव के महत्व पर जोर दिया।
फुल स्टैक डेवलपमेंट सत्र में राज कुमार दुबे (वाइस प्रेसिडेंट, जेपी मॉर्गन) ने नवाचार को उपयोगी उत्पादों में बदलने की प्रक्रिया को समझाया और टीमवर्क के साथ यूजर-केंद्रित सोच को आवश्यक बताया। अविनाश गर्ग (प्रिंसिपल सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग मैनेजर, माइक्रोसॉफ्ट) ने अपने कैंपस से कॉर्पोरेट तक के सफर को साझा करते हुए छात्रों को निरंतर प्रयास और आत्मविश्वास बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।
डेटा एनालिटिक्स सत्र में कंचन वरंदानी (एवीपी – डेटा साइंटिस्ट, बार्कलेज) ने डेटा-आधारित निर्णय लेने की आवश्यकता पर बल दिया, जबकि डॉ. आदित्य शुक्ला (सीनियर टेक्निकल लीडर, सिस्को) ने बदलते तकनीकी परिवेश में नेतृत्व क्षमता, नवाचार और अनुकूलनशीलता को महत्वपूर्ण बताया।
साइबर सिक्योरिटी सत्र में प्रांकुर चतुर्वेदी (मैनेजर, पीडब्लूसी) ने वर्तमान सुरक्षा चुनौतियों और डेटा सुरक्षा की बढ़ती आवश्यकता पर प्रकाश डाला। वहीं गौरव डांग (सॉफ्टवेयर आर्किटेक्ट, केडेन्स डिज़ाइन सिस्टम्स) ने मजबूत प्रोग्रामिंग आधार और स्केलेबल सिस्टम डिजाइन के महत्व को रेखांकित किया। मौनू सिंघल (टेक्निकल मैनेजर) ने तकनीकी प्रोजेक्ट प्रबंधन से जुड़े अपने व्यावहारिक अनुभव साझा किए।
एआई-ड्रिवन फ्यूचर सत्र में विजय सागर (प्रिंसिपल मैनेजमेंट कंसल्टेंट, एक्सेंचर) ने व्यवसायिक बदलाव में तकनीक की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया, जबकि कौशलेंद्र मिश्रा (सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर, माइक्रोसॉफ्ट) ने एआई और क्लाउड सिक्योरिटी के बढ़ते प्रभाव पर चर्चा की।
कार्यक्रम का संचालन एलुमनाई इंचार्ज प्रो. आशीष शर्मा एवं डॉ. मोनिका दत्ता के मार्गदर्शन में किया गया। इस अवसर पर डीन – इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, डॉ. अशोक भंसाली ने कहा कि ऐसे इंटरैक्शन विद्यार्थियों को अकादमिक ज्ञान के साथ-साथ वास्तविक उद्योग अनुभव से जोड़ते हैं और उनके करियर को स्पष्ट दिशा प्रदान करते हैं।
कार्यक्रम का समापन उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ, जहां छात्र न केवल प्रेरित नजर आए, बल्कि अपने भविष्य को लेकर अधिक सजग और तैयार भी दिखे।

