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Wed. Oct 7th, 2026

IIT बॉम्बे- नकल करते पकड़े जाने पर सीधे कार्रवाई नहीं:पहले छात्र का पक्ष सुनेंगे, नया ड्राफ्ट तैयार; साहिल सुसाइड केस के बाद फैसला

नई दिल्ली : छात्रों पर पढ़ाई का दबाव और आत्महत्या के मामलों को देखते हुए IIT बॉम्बे कई नियम बदलने की तैयारी में है। इसी के तहत संस्थान ने परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों पर छात्रों के खिलाफ कार्रवाई के लिए नई एसओपी का ड्राफ्ट तैयार किया है।

बीटेक छात्र साहिल वाकोडे की 18 सितंबर को आत्महत्या के बाद तैयार किए गए इस ड्राफ्ट में छात्रों को आपत्ति दर्ज कराने और मार्गदर्शन लेने का मौका देने पर जोर दिया गया है। मसौदे पर इस सप्ताह होने वाली आपातकालीन सीनेट बैठक में फैसला होगा।

नई एसओपी में नकल करते पकड़े जाने पर कार्रवाई से पहले छात्र को मेंटर या विभागाध्यक्ष से बात करने का मौका देने का प्रावधान हो सकता है। परीक्षा में अनुचित साधनों के मामलों में दी जाने वाली सजा की भी समीक्षा की गई है।

साहिल की मौत के विरोध में RPI (A) और भारत मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने IIT बॉम्बे के बाहर प्रदर्शन किया था। इस दौरान दर्जनों कार्यकर्ताओं को मुंबई पुलिस ने हिरासत में लिया था।

साहिल की मौत के विरोध में RPI (A) और भारत मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने IIT बॉम्बे के बाहर प्रदर्शन किया था। इस दौरान दर्जनों कार्यकर्ताओं को मुंबई पुलिस ने हिरासत में लिया था।

इससे क्या फायदा

  • तुरंत मेंटर सपोर्ट मिलेगा- अगर किसी छात्र को परीक्षा में गड़बड़ी या चीटिंग का संदिग्ध माना जाता है, तो अनुशासनात्मक कार्रवाई से पहले उसे किसी मेंटर से बात करने का मौका दिया जाएगा। इसका उद्देश्य छात्र को यह समझाना है कि इस घटना से उनका करियर खत्म नहीं हुआ है और वे तनाव में आकर कोई गलत कदम न उठाएं।
  • इन्विजिलेटर के लिए अलग से और स्पष्ट एसओपी होगा- इन्विजिलेटर/निरीक्षकों को यह स्पष्ट निर्देश दिया जाएगा कि परीक्षा हॉल में संदिग्ध मामले के दौरान क्या किया जा सकता है और क्या नहीं। हॉल में घटना के वक्त क्या दर्ज किया जाना जरूरी है, इसे मानकीकृत किया जाएगा ताकि छात्र पर अनुचित दबाव या अनधिकृत माफीनामा की स्थितियां न बनें।
  • परीक्षा में कदाचार के नियम- उत्तर-पुस्तिका के मुख्य पृष्ठ पर ही परीक्षा कदाचार के नियम और उनके परिणाम या सजा स्पष्ट रूप से सरल भाषा में छापे जाएंगे। इससे छात्रों को पहले से पूरी स्पष्टता रहेगी और वे अपनी गलती के असर का अत्यधिक डर या गलत अंदाजा नहीं लगाएंगे।
  • छात्रों की ज्यादा भागीदारी, उनके वेलनेस पर फोकस- छात्रों काे अधिक से अधिक प्रतिनिधित्व मिलेगा। अनुशासनात्मक मामलों को संभालने और एसओपी बनाने वाली समितियों में छात्रों की बराबर भागीदारी रखी जा रही है। मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के लिए एसोसिएट डीन ऑफ स्टूडेंट वेलनेस जैसी नई भूमिकाओं और कैंपस सपोर्ट सिस्टम को मजबूत किया जा रहा है।

एक्सपर्ट बोले- एसओपी में इतनी देर क्यों

महेश्वर पेरी, शिक्षा विशेषज्ञ के मुताबिक, उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले बच्चे भी आखिर हमारे ही बच्चे हैं। यदि घर में किसी बच्चे से कोई गलती हो जाती है या वह भटक जाता है तो क्या हम उसके साथ ऐसा बर्ताव करते हैं कि वह मौत को गले लगा ले।

हम निश्चित ही उसे संभालने व सुधारने की कोशिश करते हैं। इसी तरह परीक्षा कक्ष में छात्र के प्रति कार्रवाई के समय कक्ष निरीक्षक को सोचना चाहिए वह उसके अपने बच्चे की तरह ही है। परीक्षा कक्ष में किसी छात्र पर कार्रवाई को निरीक्षक के विवेक पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए।

लेकिन शिक्षक व छात्र के बीच बर्ताव कैसा हो, यह बात ज्यादा महत्वपूर्ण है। नकल या अनुचित साधन के प्रयोग के संबंध में निश्चित ही एक एसओपी होनी चाहिए। एसओपी में इतनी देरी आश्चर्य की बात है। ऐसे नियम पूरे देश में सभी शिक्षण संस्थानों को सख्ती से लागू करना चाहिए।

IIT बॉम्बे में इस साल तीन सुसाइड, देश का 9वां मामला

इस साल IIT बॉम्बे में सुसाइड का यह तीसरा और देश का 9वां मामला है। पिछले 6 साल के दौरान 2025 में सबसे ज्यादा 16 IIT छात्रों ने सुसाइड किया था। ग्लोबल IIT एलुमनाई सपोर्ट ग्रुप के मुताबिक, पिछले 20 साल में IIT के कुल 160 छात्रों ने आत्महत्या की हैं।

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