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जीएलए बायोटेक की ऑनलाइन कार्यशाला में प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों ने साझा किए शोध अनुभव

  • ट्रांसलेशनल बायोटेक्नोलॉजी पर तीन दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला, देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों ने साझा किए शोध अनुभव, विद्यार्थियों को मिली नवीन तकनीकों की जानकारी

दैनिक उजाला, मथुरा : जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा “फ्रॉम प्लांट्स टू पेशेंट्स: एडवांसिंग ह्यूमन हेल्थ थ्रू ट्रांसलेशनल बायोटेक्नोलॉजी” विषय पर तीन दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य पादप आधारित जैव संसाधनों, आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी, औषधीय अनुसंधान तथा मानव स्वास्थ्य के मध्य संबंधों को समझना और विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को नवीन शोध क्षेत्रों से परिचित कराना था।

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र का संचालन बायोटेक विभाग की असिस्टेंट प्रो. डॉ. खुशबू दसौनी तथा डा. माया दत्त जोशी ने किया। उन्होंने सभी मुख्य अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत की। इसके पश्चात प्रो. अंजना गोयल ने ट्रांसलेशनल बायोटेक्नोलॉजी की आवश्यकता और मानव स्वास्थ्य में इसकी बढ़ती भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। विभागाध्यक्ष प्रो. शूर वीर सिंह ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला के उद्देश्यों एवं विभिन्न विशेषज्ञ व्याख्यानों की जानकारी दी।

कार्यशाला में सीएसआईआर, आईसीएआर, डीबीटी, एम्स, टीएचएसटीआई, सीडीआरआई सहित देश के प्रतिष्ठित संस्थानों तथा विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य विश्वविद्यालयों से जुड़े वैज्ञानिकों, प्रोफेसरों और शोधकर्ताओं ने सहभागिता की। उन्होंने जैव प्रौद्योगिकी, पादप विज्ञान, नैनोप्रौद्योगिकी, जीनोम एडिटिंग, औषधीय पौधों, फाइटोफार्मास्यूटिकल्स और मानव स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर व्याख्यान दिए।

कार्यशाला में जैव प्रौद्योगिकी विभाग, कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल के प्रो. तपन कुमार नैलवाल ने “कैनाबिस: इसकी औद्योगिक एवं औषधीय महत्ता” विषय पर व्याख्यान देते हुए हिमालयी औषधीय पौधों के संरक्षण, माइक्रोप्रोपेगेशन और टिश्यू कल्चर आधारित शोध कार्यों की जानकारी दी। डॉ. रोहित सलूजा, एसोसिएट प्रोफेसर, जैवरसायन विभाग, एम्स हैदराबाद ने हर्बल उत्पादों के विश्लेषण में रियल टाइम पीसीआर तकनीक की उपयोगिता बताई। वहीं आईसीएआर-एनआईपीबी, नई दिल्ली वैज्ञानिक डॉ. अनिल कुमार सिंह ने क्रिस्पर-कास जीनोम एडिटिंग तकनीक के माध्यम से उन्नत एवं रोग प्रतिरोधी फसल किस्मों के विकास की संभावनाओं पर चर्चा की।

सीडीआरआई, लखनऊ के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. राहुल शुक्ला ने डेंगू वायरस एवं अन्य वायरल संक्रमणों के विरुद्ध उभरते फाइटोफार्मास्यूटिकल दृष्टिकोण पर व्याख्यान दिया। केंद्रीय विश्वविद्यालय हरियाणा डीन एकेडमिक अफेयर्स डॉ. पवन कुमार मौर्य ने एजिंग एवं आयु संबंधी रोगों में नैनोमटेरियल्स और डाइटरी फ्लेवोनॉइड्स की भूमिका पर प्रकाश डाला। वहीं सीएसआईआर-आईएचबीटी, पालमपुर के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. रोहित जोशी ने हिमालयी जैव संसाधनों, बांस जैव प्रौद्योगिकी और संकटग्रस्त औषधीय पौधों पर आधारित शोध कार्यों की जानकारी साझा की।

कार्यशाला के अन्य सत्रों में डॉ. भवानी प्रसाद, एसोसिएट प्रोफेसर, रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन, एनसीईआरटी भोपाल ने हाइपॉक्सिक ट्यूमर के उपचार हेतु नैनोकेरियर्स पर तथा डॉ. अमित अवस्थी, सीनियर प्रोफेसर, टीएचएसटीआई डीबीटी फरीदाबाद ने मानव स्वास्थ्य हेतु आयुष आधारित औषधियों पर व्याख्यान प्रस्तुत किया।

कार्यशाला में 90 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया। कार्यशाला का सफल समन्वय जीएलए बायोटेक विभाग की असिस्टेंट प्रो. डॉ. खुशबू दसौनी एवं डॉ. माया दत्त जोशी द्वारा किया गया। छात्र समन्वयक कार्तिकेय अग्रवाल, छात्र स्वयंसेवक कनिष्का राघव तथा तकनीकी संचालन एवं आईटी सहयोग में विशाल कुमार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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