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Fri. Apr 24th, 2026

उत्तराखंड में शिक्षा विभाग ने दबाया बिजली का बिल, गर्मी से बच्चे बेहाल; कंप्यूटर संदूक में बंद

  • भीषण गर्मी में ज्योलिकोट संकुल के तीन सरकारी स्कूलों में डेढ़ माह से बिजली नहीं है, जिससे 50 से अधिक छात्र-छात्राएं परेशान हैं

हल्द्वानी : आसमान से आग बरस रही है। तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। इन हालातों में सामान्य व्यक्ति पंखे और कूलर से दूर नहीं हो पा रहा है। लेकिन, एयर कंडीशनर (एसी) कमरों में बैठने वाले शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने सरकारी स्कूलों के बच्चों को भीषण गर्मी में तपता हुआ छोड़ दिया है।

यह स्थिति भीमताल ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय ज्योलिकोट, प्राथमिक विद्यालय गांजा और उच्च प्राथमिक विद्यालय छीड़ागाजा की है। विभागीय लापरवाही की वजह से तीन स्कूलों संग संकुल केंद्र का बिजली के बिल जमा नहीं हुआ। करीब एक वर्ष से बिल फाइलों में दबे रहे। ऊर्जा निगम ने नोटिस भी भेजे, मगर जिम्मेदार बेपरवाह बने रहे। ऐसे में निगम ने आठ मार्च को सभी कनेक्शन काट दिए।

इन सरकारी स्कूलों और सीआरसी की बिजली कटे डेढ़ माह से अधिक समय हो गया है। गर्मी बढ़ने के साथ समस्या बढ़ गई है। तीनों विद्यालयों में पढ़ने वाले 50 से अधिक छात्र-छात्राएं हैं। नन्हे-मुन्नों को तड़पता देख शिक्षक उन्हें कापियों से हवा लगाकर राहत देने की कोशिश करते हैं। जिम्मेदारों को पूरा मामले पता होने के बावजूद आंखें मूंद कर बैठे हुए हैं। उन्हें खुद को तो वातानुकूलित कमरों में बेहतर सुविधाएं चाहिए और उसके लिए सरकारी धन भी खर्च की जाती है।

निजी स्कूलों को हर साल बांटे जाते हैं कराेड़ों रुपये 

वहीं, आरटीई प्रवेशों के नाम पर निजी स्कूलों को हर साल कराेड़ों रुपये बांटे जाते हैं। लेकिन, गरीब बच्चों को सरकारी स्कूल में पंखे की हवा उपलब्ध कराने के लिए 30 से 40 हजार रुपये नहीं हैं। सीआरसी का 45 हजार रुपये बिल बकाया है। इन्हें चुकाने को बजट का रोना रोया जा रहा है।

शिक्षा विभाग के इसी रवैये के कारण सरकारी विद्यालयों की दशा खराब हो रही है। अभिभावक भी इन्हीं वजहों से बच्चों को यहां नहीं भेजते हैं। लेकिन, व्यवस्था सुधारने की बजाए सिस्टम स्कूलों से बच्चों को दूर करता दिख रहा है। ज्योलिकोट क्षेत्र के स्कूलों में डेढ़ माह से बिजली नहीं होने से तो यही नजर आता है।

बजट जारी होने के बावजूद क्यों नहीं जमा हुआ बिल?

शासन से हर साल बजट में प्रत्येक विभाग के लिए खर्च के अनुसार प्रविधान किया जाता है। शिक्षा विभाग पर सबसे ज्यादा खर्च होता है। वहीं, जब सरकार तमाम मदों में रकम जारी करती है तो नैनीताल जिले के ज्योलिकोट संकुल के सीआरसी और संकुल केंद्र का बिजली बिल क्यों जमा नहीं किया गया? शासन से आई धनराशि कहां गई? ऐसे कई सवाल हैं। जो विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है।

इंटरनेट नहीं और कंप्यूटर संदूक में बंद

सरकारी विद्यालयों में इंटरनेट की सुविधा नहीं है। ऐसे में शिक्षकों को निजी इंटरनेट का प्रयोग करना पड़ता हैॅ। ज्योलिकोट संकुल के स्कूलों के शिक्षकों ने बताया कि स्मार्ट टीवी को वे मोबाइल वाईफाई से जोड़कर चलाते हैं।

डेढ़ माह से बिजली न होने से स्मार्ट टीवी भी ठप है। इन स्कूलों में एक-एक कंप्यूटर है, लेकिन वह भी बिजली न होने से काम का नहीं है। ज्योलिकोट प्राथमिक स्कूल में तो कंप्यूटर को सुरक्षित करने के लिए संदूक में बंद कर दिया गया है।

ज्योलिकोट संकुल के बिजली बिलों में कुछ गड़बड़ हुई थी। इसे दिखवाया जा रहा है। साथ ही बजट की भी समस्या रही थी। ग्लोबल बजट से बिजली बिलों का भुगतान होता है और जल्द धनराशि मिलने की उम्मीद है। बजट आते भुगतान किया जाएगा।

– जीआर जायसवाल, मुख्य शिक्षा अधिकारी, नैनीताल

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