नोएडा : जनपद में कार्यरत श्रमिकों का वेतन 15 हजार कर दिया गया है लेकिन फैक्ट्री में अब ओवरटाइम नहीं होने से अतिरिक्त तीन-चार हजार रुपये की आमदनी नहीं होगी। इससे तनख्वाह बढ़ने की खुशी के बीच श्रमिक पशोपेश में आ गए हैं। वे समझ नहीं पा रहे हैं कि इससे उनका लाभ हुआ है या नुकसान?
दरअसल, गुरुवार की दोपहर करीब डेढ़ बजे सेक्टर-65 के पार्क में अर्जुन नाम का एक युवक पेड़ की छांव तले कागज पर हिसाब-किताब कर रहा था। सैलरी 12355 रुपये, ओवरटाइम तीन से चार हजार रुपये।
इनकम लगभग 16-17 हजार रुपये, जिसमें से घर का भाड़ा 4000 रुपये, खाने-पीने का खर्चा 3500 रुपये, गैस 350 रुपये किलोग्राम, बच्चों की पढ़ाई 7-8 हजार रुपये, मोबाइल खर्चा 500 रुपये, बाबूजी की दवाइयां 910 रुपये, फैक्ट्री आने-जाने में किराया 1500 रुपये। कुल मिलाकर 17 हजार 760 रुपये खर्चा हुआ। अब अर्जुन के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो रही थीं।
ओवरटाइम बंद होने बढ़ी बेचैनी
अर्जुन की चिंता का मूल कारण है भविष्य के लिए सैलरी बढ़कर 15 हजार हो गई, लेकिन फैक्ट्री में अब ओवरटाइम नहीं होने से अतिरिक्त तीन-चार हजार रुपये की आमदनी नहीं होगी। ये मजबूरी सिर्फ अकेले अर्जुन की नहीं थी, बल्कि आसपास बैठे अन्य कर्मचारियों के साथ भी थी। सभी ओवर टाइम काम कर कुछ अतिरिक्त कमा लेते थे, वह पैसा घर की जरूरतों को पूरा करने में सहायक होता था।
बच्चों को पालने का संकट
दरअसल, औद्योगिक इकाइयों में खराब माहौल के बीच बेपटरी हुई व्यवस्थाओं को फिर से सुधारने करने की कोशिश के बीच उद्यमियों द्वारा ओवरटाइम बंद करने से श्रमिकों की चिंता बढ़ गई है। नोएडा के लाखों श्रमिकों के सामने घर का बजट गड़बड़ाने तो कई अकेली महिलाओं पर बच्चों के पालन पोषण का संकट आ गया है।
सैलरी 15 से 17 हजार तो हो गई लेकिन…
इस गंभीर संकट के बीच श्रमिकों की परिस्थिति जानने के लिए हमनें विभिन्न औद्योगिक इकाइयों में उनसे बातचीत की, जिसमें बस्ती जिले के वेद ने बताया कि वे ओवरटाइम करने पर महीने में एकमुश्त सैलरी के साथ 20 हजार रुपये मिलते थे, जिससे बच्चों के कपड़े, दूध और अन्य सामान खरीदकर घूमना-फिरना भी कर लेते थे, लेकिन अब सैलरी 15 से 17 हजार तो हो गई।
मगर अब ओवरटाइम न होने से तीन-चार हजार रुपये का घाटा भी होगा। वहीं सेक्टर-65, 58 और सेक्टर-82 में विभिन्न स्थानों पर औद्योगिक इकाइयों के एचआर का स्टाफ सूची बनाकर श्रमिकों को काल कर डयूटी पर लौटने के बारे में पूछ रहा था।
सेक्टर-65 की एक ईकाई में 150 से ज्यादा श्रमिकों ने दोबारा काम पर लौटने के लिए स्टाफ को स्पष्ट जवाब नहीं दिया। उधर, उद्यमियों का तर्क है कि उत्पादन लक्ष्य की पूर्ति के लिए दो अलग-अलग शिफ्ट में नए कर्मचारी ही काम कर पाएंगे। एक शिफ्ट का कर्मचारी दूसरी शिफ्ट में काम नहीं कर पाएगा।
“ओवरटाइम की प्रक्रिया बंद नहीं होनी चाहिए। परिवार पालने के लिए मैं 15 हजार रुपये के वेतन के साथ तीन-चार हजार रुपये ओवरटाइम से कमा लेता हूं। नोएडा में 15-16 हजार खर्चा हो जाता है। ओवरटाइम के रुपयों को घर भेज देता हूं। बच्चों की पढ़ाई के लिए 40 हजार का लोन भी लिया है। अब इनकम घटेगी तो मुझे गांव लौटना पड़ सकता है।”
-छोटेलाल, बिहार
“मैं 18 हजार सैलरी और फूड शाप में ओवरटाइम से डेढ़ हजार रुपये तक कमा लेता हूं। घर के भाड़े से लेकर तमाम जरूरतों के लिए कुल 17-18 हजार खर्च हो जाते हैं। मेरे परिवार में पांच सदस्य हैं। ओवर टाइम बंद होने से कई जरूरी काम नहीं होंगे।”
-राजन सिंह, अयोध्या।

