Breaking
Fri. Apr 24th, 2026

चुनाव कराएंगे, मगर वोट नहीं दे पाएंगे… बंगाल में मतदाता सूची से 65 चुनाव अधिकारियों के नाम कटे; SC पहुंचा मामला

  • पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के दौरान 65 चुनाव अधिकारियों के नाम हटा दिए गए हैं, जिससे वे चुनाव ड्यूटी पर होने के बावजूद मतदान नहीं

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। चुनाव ड्यूटी पर तैनात 65 अधिकारियों के नाम ही मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। इससे नाराज इन अधिकारियों ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।

दरअसल, चुनाव आयोग के आदेश पर बंगाल में मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया गया था। इस कवायद में पूरे राज्य से 90.8 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए। हैरानी की बात यह है कि चुनाव संपन्न कराने वाले 65 अधिकारियों के नाम भी इस सूची से गायब हैं।

CJI ने क्या कहा?

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील एमआर शमशाद ने कोर्ट में कहा, “ये 65 अधिकारी चुनाव ड्यूटी पर हैं। इनके ड्यूटी आर्डर पर वोटर आइडी नंबर भी दर्ज हैं, लेकिन अब वो नंबर ही डिलीट कर दिए गए हैं। जो लोग चुनाव करवा रहे हैं, वही वोट नहीं डाल पाएंगे। यह मनमाना फैसला है। कई लोगों को नाम हटाने की वजह तक नहीं बताई गई।”

इसपर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, “अपनी दलीलें अपीलीय ट्रिब्यूनल के सामने रखें।” जस्टिस जयमाल्य बागची ने टिप्पणी की, “ट्रिब्यूनल उचित आदेश देगा। इस चुनाव में शायद ये वोट न दे पाएं, लेकिन मतदाता सूची में बने रहने का इनका ज्यादा महत्वपूर्ण अधिकार सुरक्षित रहेगा।”

विपक्ष के आरोप

बिहार के बाद बंगाल, तमिलनाडु और केरल में मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग और भाजपा की मिलीभगत से लाखों मतदाताओं, खासकर हाशिए के समुदायों के नाम जान-बूझकर हटाए जा रहे हैं।

बंगाल में गुरुवार को पहले चरण का मतदान हुआ, जिसमें 92.8 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि 90.8 लाख नाम हटाने से वोटर बेस ही कम हो गया, जिससे मतदान प्रतिशत बढ़ा हुआ दिख रहा है। वहीं भाजपा इसे सत्ता परिवर्तन का संकेत बता रही है।

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *