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जीएलए में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में पर्यावरणीय चेतना का शंखनाद

  • जीएलए विश्वविद्यालय के सिविल इंजीनियरिंग विभाग में आयोजित हुई दो दिवसीय ‘स्पेस‘ अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी

दैनिक उजाला, मथुरा : जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के सिविल इंजीनियरिंग विभाग में आयोजित दो दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश विदेश के विषय-विशेषज्ञों ने एक मंच पर एकजुट होकर सतत विकास, शोध और पर्यावरण संरक्षण को लेकर चर्चा हुई।

‘सस्टेनेबल प्रेक्ट्सि एंड एडवांस इन सिविल इंजीनियरिंग (स्पेस)‘‘ विषय पर आयोजित संगोष्ठी के शुभारंभ के अवसर पर मुख्य अतिथि जीएलए के प्रतिकुलाधिपति प्रो. दुर्ग सिंह चौहान ने कहा कि बढ़ती पर्यावरणीय चिंताओं और जलवायु परिवर्तन से निपटने की तत्काल आवश्यकता को देखते हुए, हरित भविष्य के निर्माण में सिविल इंजीनियरिंग की भूमिका सर्वोपरि हो गई है। हमारी समाज की विकासवादी नीतियों की सत्य निष्ठा ही सस्टेनेबिलिटी को जन्म देगी और पर्यावरण संरक्षण पर भी ध्यान देगी। क्योंकि विकास का मतलब यह नहीं है कि हम लोग विकास की आड़ में पर्यावरण संरक्षण को भूल जायें। विकास भी पर्यावरण अनूकुल होना चाहिए।

इसी विचारधारा का प्रतिपादन करते हुए आइआइटी रूड़की के प्रो. सी एसपी ओझा ने कहा कि हम अपनी प्रार्थना में नदियों का गुणगान करते हैं, लेकिन वास्तविकता में अपने कर्मकांडों द्वारा हर दिन उनका प्रदूषण करते हैं। उन्होंने जीएलए के शोधार्थियों से कहा कि कार्तिक पूर्णिमा और दीपावली जैसे पावन दिवस पर यमुना जल के प्रदूषण को कम करने के लिए यमुना जल की शुद्धता को पुनर्स्थापित करने के लिए संकल्प बंद होकर के शोध और विकास का कार्य तेजी से करें।

स्पेंजिया यूनिवर्सिटी इटली की असिस्टेंट प्रोफेसर डा. लिंडा गिरेसनी ने वर्तमान में वैश्विक चुनौतियों से निपटने में स्थिरता की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया और पारंपरिक तरीकों के साथ अभिनव समाधानों को एकीकृत करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। पारिस्थितिकी संरक्षण के साथ विकास को संतुलित करने के महत्व पर जोर देते हुए डॉ. गिरेसनी ने विस्तार से बताया कि प्रकृति के साथ सामंजस्य में निहित पारंपरिक प्रथाएं कैसे सतत विकास में मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान कर सकती हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से सार्थक चर्चाओं में सक्रिय रूप से शामिल होने और एक ऐसे भविष्य को आकार देने में योगदान देने का आग्रह करते हुए अपना संबोधन समाप्त किया, जिसमें प्रगति और पर्यावरण संरक्षण दोनों को प्राथमिकता दी जाती है।

जीएलए विश्वविद्यालय के सिविल इंजीनियरिंग विभाग में आयोजित हुई दो दिवसीय ‘स्पेस‘ अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान अथितियों को सम्मानित करते प्रतिकुलाधिपति प्रो. दुर्ग सिंह चौहान। फोटो-दैनिक उजाला.

सर्वप्रथम संगोष्ठी के अध्यक्ष प्रो. सुभाष त्रिपाठी ने सम्मेलन की पृष्ठभूमि और प्रसंग को विशिष्टता से रेखांकित करते हुए सस्टेनेबिलिटी को सनातन संस्कृति का आधारभूत तत्व बताया। उन्होंने शुभारंभ सत्र के मुख्य अतिथि प्रो. डी एस चौहान और सम्मानित अतिथि प्रो. सी एसपी ओझा का पुष्पगुच्छ और शॉल देकर स्वागत किया।

इनके अलावा अन्य संस्थानों से एनआइसीएमएआर दिल्ली के निदेशक डा. राजेश गोयल, एमएनआईटी भोपाल से डा. एच एल तिवारी, एमएनआइटी जयपुर से डा. विकास कुमार सिंघल, भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर मुंबई से डा. कपिलेश भार्गव और डा. रंजन कुमार, एनआईटीटीआर कोलकाता से डा. केआर सिंह, मानव रचना विश्वविद्यालय से प्रो. अरुणांशु मुखर्जी तथा अन्य आमंत्रित विद्धानां ने अपना अभिभाषण प्रस्तुत किया।

कांफ्रेंस के अंत में धन्यवाद प्रस्ताव कांफ्रेंस संयोजक डा. दीपक कुमार तिवारी और डॉ. राहुल रे जी ने समिल्लित रूप से दिया। इस अवसर पर सिविल विभाग के विभागाध्यक्ष डा. मोहित वर्मा ने कहा कि विद्यार्थियों को पर्यावरण अनूकुल शोधों पर कार्य करने की जरूरत है। ऐसे ही सम्मेलन विद्यार्थियों के लिए बहुत सफलतम साबित होते हैं। जीएलए के प्रोफेसर डा. अनिरूद्ध प्रधान ने भी सिविल इंजीनियरिंग विषय पर अपना संबोधन दिया।

इस सम्मेलन में पहली बार राष्ट्रीय स्तर के शिक्षाविद प्रो. ओझा एवं डा. कपिलेश भार्गव को अपने विशिष्ट कार्यक्षेत्र में अतिविशिष्ट योगदान के लिए मुख्य अतिथि द्वारा सम्मानित किया गया।

विभाग के अन्य सदस्य डा. मानवेन्द्र वर्मा, विनोद कुशवाह, पायल दुबे, राधा तोमर आदि का सहयोग सराहनीय रहा।

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