- औद्योगीकरण के साथ भारत और विदेशों में मैकेनिकल इंजीनियरिंग का दायरा लगातार बढ़ रहा
दैनिक उजाला, मथुरा : जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग ने स्पेक्ट्रॉन रोबोटिक्स कंपनी और लॉयड स्किल सेंटर के सहयोग से ड्रोन विकास और नवाचार पर पांच दिवसीय कार्यशाला आयोजित की। कार्यशाला का उद्देश्य ड्रोन प्रौद्योगिकी में कौशल विकास और तकनीकी प्रगति को बढ़ावा देना है।
कार्यशाला का शुभारंभ कुलपति प्रो. अनूप कुमार गुप्ता ने किया। उन्होंने जिन्होंने ड्रोन प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी क्षमता को रेखांकित करते हुए एक प्रेरणादायक संबोधन दिया। कृषि, लॉजिस्टिक्स, निगरानी और आपदा प्रबंधन में इसके अनुप्रयोगों पर जोर देते हुए प्रतिभागियों को इस तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करने के लिए कार्यशाला का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
प्रतिष्ठित विशेषज्ञों, जिनमें लॉयड स्किल सेंटर के प्रमुख प्रो. मनीष सरस्वत और स्पेक्ट्रॉन रोबोटिक्स कंपनी के संस्थापक और सीईओ प्रियांशु रॉय शामिल थे। उन्होंने तकनीकी सत्र आयोजित किए। प्रो. सारस्वत ने ड्रोन डिजाइन और संचालन की तकनीकी जटिलताओं पर प्रकाश डाला, जबकि श्री रॉय ने ड्रोन उद्योग में अत्याधुनिक नवाचारों और उद्यमिता के अवसरों पर चर्चा की।
इस आयोजन का समन्वय जीएलए विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर डा. पंकज सोनिया ने किया, जिनके प्रयासों ने सभी प्रतिभागियों के लिए एक सुचारु अनुभव सुनिश्चित किया। यह कार्यशाला ड्रोन विकास में व्यावहारिक कौशल प्रदान करने के लिए हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण, परस्पर संवादात्मक सत्र और परियोजना प्रदर्शन शामिल है।
मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख प्रो. पीयूष सिंघल ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए ड्रोन प्रौद्योगिकी में कौशल विकास के महत्व पर बल दिया। उन्होंने उपस्थित लोगों को व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने और उद्योग के रुझानों से अवगत रहकर इस क्षेत्र में अग्रणी बनने के लिए प्रोत्साहित किया। इस दौरान उन्होंने बताया कि मैकेनिकल इंजीनियरिंग सबसे पुराने और सबसे बहुमुखी विषयों में से एक है। चाहे भविष्य के वाहनों को डिजाइन करना हो, ऊर्जा प्रणालियों में सुधार करना हो या रोबोटिक ऑटोमेशन विकसित करना हो, मैकेनिकल इंजीनियरिंग का दायरा लगभग हर उद्योग को छूता है। बढ़ते औद्योगीकरण के साथ, भारत और विदेशों में मैकेनिकल इंजीनियरिंग का दायरा लगातार बढ़ रहा है, जिससे रोजगार की अनंत संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त हो रहा है। यही कारण है कि मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र आज ड्रीम कंपनियों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
डीन रिसर्च प्रो. कमल शर्मा ने बताया यह पहल नवाचार को बढ़ावा देने और छात्रों को तकनीकी युग की चुनौतियों के लिए तैयार करने के लिए जीएलए विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। जिसने छात्रों, शोधकर्ताओं और उत्साही लोगों को मानवरहित हवाई प्रणालियों के भविष्य की खोज के लिए आकर्षित किया। पिछले कुछ वर्षों में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की तरफ छात्रों का रूझान बढ़ा है। जीएलए में भी मैकेनिकल इंजीनियरिंग में प्रवेश के लिए छात्र रूचि दिखा रहे हैं।

