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यूपी के 1.86 लाख शिक्षकों की नौकरी पर खतरा टला:सुप्रीम कोर्ट ने TET पास करने का वक्त दिया; 31 अगस्त 2028 आखिरी तारीख

उत्तर प्रदेश : सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों के लिए TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) पास करने की समय सीमा एक साल बढ़ा दी है। अब शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक टीईटी क्वालिफाई करना होगा। पहले इसकी अंतिम तारीख 31 अगस्त 2027 तय थी।

जस्टिस दीपांकर दत्ता की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच ने यह फैसला कई रिवीजन पिटीशन पर सुनवाई के बाद दिया है। हालांकि अदालत ने उन पिटीशन को फिर से खारिज कर दिया है, जिसमें 2009 से पहले नियुक्त हुए सभी टीचर्स को अनिवार्य टीईटी के दायरे से बाहर रखने की मांग की गई थी।

अदालत ने कहा, देश में काम कर रहे सभी टीचर्स को 31 अगस्त 2028 तक टीईटी पास करना ही होगा। ऐसे में टीईटी अनिवार्यता मामले में यूपी के 1.86 लाख शिक्षकों की नौकरी पर खतरा अभी भी कायम है।

13 मई को अदालत ने राहत की मांग कर रहे शिक्षकों से कहा था,

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स्वार्थी न बनें और केवल अपनी नौकरी की सुरक्षा के बारे में ही न सोचें, बल्कि उन बच्चों के बारे में भी विचार करें, जिन्हें क्वालिटी वाली एजुकेशन की आवश्यकता है।QuoteImage

अदालत ने यह सख्त टिप्पणी तब की थी, जब यूपी-एमपी की सरकारों और पश्चिम बंगाल व केरल के शिक्षक संघों द्वारा दायर की गईं कई टीईटी अनिवार्यता विरोधी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।

इन याचिकाओं में सितंबर 2025 के सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले की समीक्षा की मांग की गई थी, जिसमें देशभर के गैर-अल्पसंख्यक स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले कार्यरत शिक्षकों को दो वर्षों के भीतर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करने का निर्देश दिया गया था। तब सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने इन पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।

यूपी के 30 हजार टीचरों ने TET अनिवार्यता के खिलाफ 2 महीने पहले दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रदर्शन किया था।

यूपी के 30 हजार टीचरों ने TET अनिवार्यता के खिलाफ 2 महीने पहले दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रदर्शन किया था।

कैसे टीईटी मामले में फंसा पेंच

संसद ने 4 अगस्त, 2009 को निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम (RTE-2009) पारित किया। इसे 1 अप्रैल, 2010 से देशभर में लागू किया गया। इस कानून का उद्देश्य 6 से 14 साल के हर बच्चे को कक्षा- 1 से 8 तक मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देना है।

राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) ने शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य किया। 27 जुलाई, 2011 को आदेश जारी कर प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर भर्ती के लिए TET अनिवार्य सेवा शर्त बनाई गई।

1 सितंबर, 2025 को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने बड़ा फैसला दिया। कहा-

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जिनकी सेवा 5 साल से ज्यादा बाकी है। ऐसे सभी शिक्षकों को 2 साल (सितंबर 2027 तक) में TET पास करना अनिवार्य होगा। जिनकी नौकरी 5 साल से कम बची है, उनको छूट तो दी गई। लेकिन, प्रमोशन के लिए उन्हें भी TET पास करना जरूरी है।QuoteImage

साथ में पीठ ने 2014 के कर्नाटक के प्रमति एजुकेशनल एंड कल्चरल ट्रस्ट फैसले पर भी सवाल उठाया। जिसमें RTE Act को अल्पसंख्यक संस्थानों (सहायता प्राप्त या गैर-सहायता प्राप्त) से पूरी छूट दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि फैसले की समीक्षा जरूरी है। मामला संवैधानिक पीठ को भेज दिया गया।

यूपी के 1.86 लाख शिक्षकों की नौकरी पर संकट

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से देश भर के 21 लाख शिक्षक आंदोलन कर रहे हैं। इनमें यूपी के 1.86 लाख शिक्षक भी शामिल हैं। कई शिक्षक तो 20 से 25 साल से पढ़ा रहे हैं। उनका कहना है कि इतनी नौकरी के बाद फिर से परीक्षा लेना कहां तक तर्कसंगत है? शिक्षक संघों का दावा है कि इसी तनाव में 2 शिक्षकों की मौत भी हो चुकी है।

शिक्षकों के आंदोलन के चलते ही यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह के समक्ष रिव्यू पिटीशन दाखिल की थी, जिस पर शुक्रवार को फैसला आया।

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