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जम्मू-कश्मीर की किताब में आतंकी हाफिज सईद को महान बताया:FIR दर्ज, 8 अफसर सस्पेंड; भाजपा बोली- ये एकेडमिक जिहाद, बुक बैन करें

जम्मू : जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी के लिए खरीदी गई दो किताबों को लेकर UAPA के तहत FIR दर्ज गई है। इन किताबों में मुंबई हमलों के मास्टर माइंड आतंकी हाफिज सईद और अलगाववादी नेता मकबूल भट को महान हस्तियां बताया गया है। पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस विंग ने शनिवार FIR दर्ज करके छापेमारी शुरू कर दी है।

विवादित किताबों में से एक हिलाल अहमद और संतोष मीना की ‘पर्सनैलिटीज एंड लीजेंड्स ऑफ J&K’ है। इसे जम्मू की ओबेरॉय बुक सर्विस ने प्रकाशित किया है। दूसरी किताब सुशांत गिरी की ‘ग्रेट पर्सनैलिटी ऑफ जम्मू-कश्मीर’ है। इसे दिल्ली के अनुराग प्रकाशन ने पब्लिश किया है।

अधिकारियों के मुताबिक, एक किताब की 123 प्रतियां जम्मू, रामबन और उधमपुर जिलों में भेजी गई थीं, जबकि दूसरी किताब की 128 प्रतियां जम्मू और बारामूला जिलों में बांटी गई थीं।

भाजपा ने इसे एकेडमिक जिहाद बताते हुए किताबों पर बैन और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है। BJP ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से शिक्षा मंत्री के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की।


किताब के पन्नों का वह हिस्सा जिसमें अलगाववादियों के बारे में लिखा है…

मकबूल भट (18 फरवरी 1938-11 फरवरी 1984) जम्मू-कश्मीर के एक अलगाववादी नेता और जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के सह-संस्थापक थे। दो हत्या के मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद उन्हें 11 फरवरी 1984 को नई दिल्ली की तिहाड़ जेल में फांसी दी गई थी।

मकबूल भट (18 फरवरी 1938-11 फरवरी 1984) जम्मू-कश्मीर के एक अलगाववादी नेता और जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के सह-संस्थापक थे। दो हत्या के मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद उन्हें 11 फरवरी 1984 को नई दिल्ली की तिहाड़ जेल में फांसी दी गई थी।

मीरवाइज मुहम्मद उमर फारूक: (जन्म: 23 मार्च 1973) ऑल पार्टीज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष हैं। यह जम्मू-कश्मीर के विभिन्न राजनीतिक दलों का एक गठबंधन है, जो राज्य की स्वतंत्रता की वकालत करता है। वह श्रीनगर की जामा मस्जिद के मीरवाइज (मुख्य धार्मिक उपदेशक) भी हैं।

मीरवाइज मुहम्मद उमर फारूक: (जन्म: 23 मार्च 1973) ऑल पार्टीज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष हैं। यह जम्मू-कश्मीर के विभिन्न राजनीतिक दलों का एक गठबंधन है, जो राज्य की स्वतंत्रता की वकालत करता है। वह श्रीनगर की जामा मस्जिद के मीरवाइज (मुख्य धार्मिक उपदेशक) भी हैं।

सैयद अली शाह गिलानी (जन्म: 29 सितंबर 1929) जम्मू-कश्मीर के एक अलगाववादी नेता थे। वह पहले जमात-ए-इस्लामी कश्मीर के सदस्य थे, लेकिन बाद में उन्होंने तहरीक-ए-हुर्रियत नाम से अपनी पार्टी बनाई। वह अलगाववादी दलों के संगठन ऑल पार्टीज़ हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष भी रहे। इसके अलावा, वह सोपोर विधानसभा क्षेत्र से विधायक (MLA) भी रह चुके थे।

सैयद अली शाह गिलानी (जन्म: 29 सितंबर 1929) जम्मू-कश्मीर के एक अलगाववादी नेता थे। वह पहले जमात-ए-इस्लामी कश्मीर के सदस्य थे, लेकिन बाद में उन्होंने तहरीक-ए-हुर्रियत नाम से अपनी पार्टी बनाई। वह अलगाववादी दलों के संगठन ऑल पार्टीज़ हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष भी रहे। इसके अलावा, वह सोपोर विधानसभा क्षेत्र से विधायक (MLA) भी रह चुके थे।

विवाद की वजह…

  • जम्मू-कश्मीर को भारत अधिकृत कश्मीर और भारत के कब्जे वाला कश्मीर कहा गया।
  • प्रतिबंधित संगठन JKLF के संस्थापक मकबूल भट्ट को शहीद बताया गया।
  • अलगाववादी नेताओं सैयद अली शाह गिलानी, शब्बीर शाह, मीरवाइज उमर फारूक को प्रभावशाली व्यक्तित्व बताया है।

पूर्व डीजीपी बोले- ये बातें पाकिस्तान के एजेंडे को बढ़ावा देती हैं

जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने कहा कि मसरत आलम, सैयद अली शाह गिलानी और शब्बीर शाह जैसे लोग पाकिस्तान की ISI और वहां की सरकार का एजेंडा आगे बढ़ाते थे।

उन्होंने कहा, अगर इन्हें महान नेता की तरह पेश किया जाएगा, तो नई पीढ़ी को यही संदेश मिलेगा कि बड़ा बनने के लिए इन्हीं जैसा बनना चाहिए। किताब में मीरवाइज उमर फारूक को कश्मीर की आखिरी उम्मीद बताया गया है। क्या सच में जम्मू-कश्मीर के लोग ऐसा मानते हैं? इस तरह की बातें पाकिस्तान के एजेंडे को बढ़ावा देती हैं।

स्कूल शिक्षा विभाग ने आदेश देकर वापस मंगाई किताबें

राज्य के 1832 सरकारी स्कूलों और 394 पीएम श्री स्कूलों के लिए ‘समग्र शिक्षा’ लाइब्रेरी ग्रांट के तहत उम्र के हिसाब से सही किताबें खरीदने का आदेश जारी हुआ था। लाइब्रेरी की किताबें चुनने के लिए जम्मू और कश्मीर दोनों डिवीजनों के एक्सपर्ट्स और एकेडेमिक्स की चार सब-कमेटी बनाई गई थीं। इन कमेटियों ने 364 पब्लिशर्स से जमा की गई 463 किताबों को चुना।

विवाद बढ़ने पर विभाग ने किताबें वापस लेने का आदेश जारी किया। इसमें कहा गया, “विभाग के ध्यान में आया है कि इन किताबों में बहुत ही आपत्तिजनक कंटेंट है। यह साफ है कि सब-कमेटी सीरीज 4 के सदस्यों और सुपरवाइजरी अधिकारियों ने ऐसी किताबों की सिफारिश करने में गंभीर लापरवाही बरती, अपनी ड्यूटी ठीक से नहीं निभाई और रूजरी सावधानी नहीं रखी।

लेखकों और पब्लिशर्स को केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में बैन और ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। इसमें यह भी निर्देश दिया गया कि उनकी लिखी या पब्लिश किए गए सभी प्रिंटेड मटेरियल को केंद्र शासित प्रदेश से वापस ले लिया जाए।

मामले की जांच के लिए 2 अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। इसकी रिपोर्ट 30 दिन के अंदर सक्षम अधिकारी को सौंपने का निर्देश दिया गया है।

8 अधिकारी सस्पेंड किए गए

विवाद बढ़ने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने शुक्रवार को दोनों किताबों को तत्काल प्रभाव से वापस लेने का आदेश जारी कर दिया है। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी एक्शन लेते हुए राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग के 8 अधिकारियों को निलंबित कर दिया। एक संविदा कर्मचारी की सेवा भी समाप्त की गई और पूरे मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं।

सस्पेंड अधिकारियों के नाम

राजमोहिनी, लेक्चरर, गवर्नमेंट गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल, पुंछ

फजिल इमरान सिद्दीकी, कोऑर्डिनेटर लाइब्रेरी, समग्र शिक्षा

गुरजीत सिंह, असिस्टेंट कोऑर्डिनेटर, समग्र शिक्षा

संजीव शर्मा, प्रिंसिपल, गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल, कोट पन्नू, कठुआ

शाजिया कौसर, एकेडमिक ऑफिसर, SCERT जम्मू

इम्तियाज अहमद मीर, लेक्चरर, BHSS वथूरा, बडगाम

निरंजन शर्मा, लेक्चरर, गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल बड़हट, किश्तवाड़

रेनू मेंगी, लेक्चरर, DIET जम्मू

पब्लिशर के दफ्तर पर छापा, UAPA समेत कई धाराओं में केस

पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 49 (उकसावा), 61(2) (आपराधिक साजिश), 152 (देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालना), 196 (वैमनस्य फैलाना) और 353 (झूठे बयान या अफवाहें प्रकाशित करना) के अलावा गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 13 के तहत मामला दर्ज किया है।

FIR दर्ज होने के बाद काउंटर इंटेलिजेंस टीम ने जम्मू के बहु प्लाजा में एक पब्लिशर के दफतर पर छापा मारा। जांच के दौरान पुलिस ने कई दस्तावेज और डिजिटल सबूत जब्त किए हैं। फिलहाल इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

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