बालाघाट : राहुल गांधी ने गुरुवार को मध्यप्रदेश के बालाघाट में बिरसा ब्लॉक के जगला गांव में बैगा आदिवासियों से मुलाकात की। यहां वे करीब एक घंटे रुके और बीमारी से जान गंवाने वाले बच्चों के परिवारों से भी मिले। राहुल से मिलने आसपास के गांवों से करीब डेढ़ हजार लोग पहुंचे। इससे पहले उन्होंने माटे प्राथमिक शासकीय स्कूल में बच्चों से मिड डे मील के बारे में जाना।
बालाघाट में पिछले 3 महीनों में कुपोषण और मलेरिया से 32 आदिवासी बच्चों की मौत हुई है। राहुल ने कहा कि बीमारी से निपटने में राज्य सरकार पूरी तरह फेल रही। वे यह मुद्दा लोकसभा में उठाएंगे।
उन्होंने आदिवासी महिलाओं को लाड़ली बहना योजना का लाभ नहीं मिलने का भी आरोप लगाया। कांग्रेस का दावा है कि मौतों की संख्या ज्यादा है, जबकि भाजपा ने राहुल के दौरे को राजनीतिक माइलेज लेने की कवायद बताया है।
मध्य प्रदेश की आबादी में आदिवासियों की हिस्सेदारी 21.1% है, यानी हर पांचवां व्यक्ति। इसका असर चुनाव में भी दिखता है। विधानसभा की 230 सीटों में 47 ST के लिए आरक्षित हैं, जबकि 37 अन्य सीटों पर भी आदिवासी वोट अहम माना जाता है। यानी कुल 84 सीटों पर इसका असर है। लोकसभा की 29 सीटों में 6 ST के लिए आरक्षित हैं।

राहुल आदिवासियों के बीच करीब एक घंटा रहे। उनकी समस्याओं को भी सुना।

राहुल ने एक बच्चे को गोद में लेकर खिलाया।
राहुल बोले- परिवारों को मुआवजा नहीं मिला
- बालाघाट के आदिवासी इलाकों में कई बच्चों की मौत बीमारी और कुपोषण की वजह से हुई है। इसके अलावा, सरकार को जो मदद देनी चाहिए, चाहे वह स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा या रोजगार से जुड़ी हो। वह यहां बिल्कुल नहीं मिल रही है। ऐसा लगता है जैसे आदिवासियों को भारत के बीचों-बीच अकेला छोड़ दिया गया हो, मानो उनके लिए न तो केंद्र सरकार है और न ही मध्य प्रदेश सरकार।
- क्षेत्र में कुपोषण और बीमारियों की वजह से कई बच्चों की जान गई है, लेकिन सरकार की तरफ से स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार का कोई सहयोग नहीं मिल रहा है।
- मनरेगा ठप है, वन अधिकार कानून लागू नहीं हो रहा और आदिवासियों को जमीन के पट्टे नहीं मिल रहे हैं।
- बच्चों की मौत के बावजूद पीड़ित परिवारों को पूरा मुआवजा तक नहीं मिला है। आधे लोग अब भी इससे वंचित हैं।
- सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाएं। वन अधिकार कानून के तहत आदिवासियों को पट्टे दे, मनरेगा का काम फिर शुरू करें और इलाके में स्कूल व अस्पताल बनाएं।
- सरकार 24 घंटे विकास की बातें करती है और भ्रष्टाचार जारी रहता है, लेकिन जब आदिवासी भाइयों को मदद की जरूरत होती है, तो सरकार गायब दिखती है।
- एक योजना का लाभ मिलने पर ‘लाड़ली बहना योजना’ की राशि काट ली जाती है; यदि दो योजनाएं चल रही हैं, तो आदिवासियों को दोनों का पूरा हक मिलना चाहिए।
- हम इन्हें ‘वनवासी’ नहीं, बल्कि ‘आदिवासी’ मानते हैं। यानी देश के मूल और पहले मालिक। कांग्रेस सरकार आते ही इनकी पूरी मदद करेगी और शिक्षा, स्वास्थ्य व रोजगार में इनका हक दिलाएगी।
राहुल बोले- 24 घंटे विकास की बातें, लेकिन भ्रष्टाचार भी 24 घंटे
राहुल गांधी ने कहा कि सरकार हर समय विकास की बातें करती है, जबकि भ्रष्टाचार भी चौबीसों घंटे चल रहा है। उन्होंने कहा कि जरूरत के समय आदिवासी परिवारों के साथ सरकार नजर नहीं आती।

