न्यूयॉर्क : विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका से रिश्तों को लेकर कहा कि वह आतंकवाद पर भारत की चिंता नहीं समझता है। इसका असर रिश्तों पर पड़ता है। उन्होंने सोमवार को न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी के एक कार्यक्रम में कहा,

भारत ने कई दशकों तक अपने पड़ोसी देश की ओर से आतंकवाद का सामना किया है। अगर अमेरिका को इसकी गंभीरता समझ नहीं आती, तो रिश्तों पर असर पड़ता है।
जयशंकर ने चीन और अमेरिका के बीच बढ़ रही दोस्ती को लेकर कहा कि अब अमेरिका एक साथ रूस, यूक्रेन और चीन जैसे देशों के साथ संबंध अच्छे कर रहा है। अब वह भारत का डिप्लोमेसी मॉडल अपना रहा है। पहले भारत की इसी नीति को लेकर अमेरिका में आलोचना की जाती थी।

पूर्व अमेरिकी राजनयिक डेनियल रसेल ने एशिया सोसाइटी के कार्यक्रम में जयशंकर के साथ बातचीत की।
टैरिफ विवाद पर: अमेरिका से रिश्ते मुश्किल
अमेरिका के पूर्व राजनयिक डेनियल रसेल ने जयशंकर से पूछा कि व्यापार और टैरिफ को लेकर पिछले एक साल में भारत-अमेरिका के रिश्तों में आई खटास को कैसे दूर किया जा सकता है।
इस पर जयशंकर ने कहा कि दुनिया के कई देशों के लिए अमेरिका के साथ रिश्ते पहले के मुकाबले मुश्किल हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह शायद हमारे लिए राहत की बात न हो, लेकिन यही हकीकत है।
US-चीन दोस्ती पर: उनका दिखावा खत्म हो गया
जयशंकर ने कहा कि पहले अमेरिका में यह सोच थी कि भारत के पास ज्यादा विकल्प नहीं होने चाहिए और उसे अपने रिश्तों में ज्यादा ध्यान अमेरिका पर रखना चाहिए, लेकिन अब उसका दिखावा खत्म हो गया है।
उन्होंने कहा- अब अमेरिका खुद एक साथ एशिया के दूसरे देशों के साथ रिश्ते संभाल रहा है। यानी जिस नीति पर भारत से सवाल किए जाते थे, अब अमेरिका भी उसी पर चल रहा है।
बहुध्रुवीय व्यवस्था पर: यह च्यूइंग गम हर किसी के पास
जयशंकर के मुताबिक दुनिया अब ऐसे दौर में पहुंच रही है, जहां देश किसी एक के भरोसे रहने के बजाय कई देशों के साथ अपने रिश्ते बना रहे हैं। यही बदलाव दुनिया को बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर ले जा रहा है।
उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि अब यह ‘च्यूइंग गम’ सबके पास होगा और हर देश इसे अपने तरीके से इस्तेमाल करेगा।
उन्होंने कहा कि यह बदलाव अच्छा लगे या नहीं, लेकिन जब अमेरिका जैसी बड़ी ताकत इस तरीके से काम करती है तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ता है और यह एक वैश्विक ट्रेंड बन जाता है।

विदेश मंत्री जयशंकर न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी के कार्यक्रम में बोलते हुए।
चीन से सीमा विवाद पर: दूसरे देशों को फायदा न मिले
जयशंकर ने कहा कि भारत और चीन के रिश्ते पिछले कुछ समय के मुकाबले बेहतर हुए हैं। 2020 में सीमा पर तनाव के बाद दोनों देशों के रिश्ते काफी बिगड़ गए थे, लेकिन अब सीमा पर स्थिति सामान्य होने के साथ रिश्ते भी धीरे-धीरे सुधर रहे हैं। हालांकि सभी समस्याएं खत्म नहीं हुई हैं।
उन्होंने कहा,

2024-2025 के मुकाबले आज की स्थिति बेहतर है। सीमा पर जैसे हालात होंगे, दोनों देशों के रिश्ते भी वैसे ही रहेंगे। यह तनाव दोनों देशों के हित में नहीं है। ऐसी समस्या में फंसे रहना ठीक नहीं है, जिसका फायदा दूसरे देशों को मिले।
ग्लोबल सिस्टम पर: डिप्लोमेसी पहले से ज्यादा मुश्किल
जयशंकर ने कहा कि मौजूदा समय में दुनिया में कई जगह जंग चल रही है। इसके साथ आर्थिक दबाव और व्यापार को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करने की कोशिशों ने भी दुनिया के हालात को अस्थिर कर दिया है।
जयशंकर ने कहा कि दुनिया की सप्लाई चेन भी पहले के मुकाबले ज्यादा असुरक्षित हो गई है। दुनिया के सामने ‘4F संकट’ यानी भोजन, ईंधन, खाद और पैसों की कमी को बड़ी चुनौती हैं।

