वॉशिंगटन डीसी : अमेरिका, भारत को वेनेजुएला से तेल खरीदने की इजाजत दे सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रम्प प्रशासन के एक सीनियर अधिकारी ने इसकी जानकारी दी है।
इसका मतलब यह है कि अमेरिका के प्रतिबंधों की वजह से जो व्यापार रुका हुआ था, वह अब फिर से शुरू हो सकता है, लेकिन यह सब अमेरिका की निगरानी और शर्तों के साथ होगा।
हालांकि इससे जुड़ी शर्तें क्या हैं, इसकी जानकारी अभी नहीं मिल पाई है। वहीं, रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस भी चाहती है कि अमेरिका उसे वेनेजुएला का तेल खरीदने की इजाजत दे दे।
दूसरी ओर ट्रम्प ने शुक्रवार को व्हाइट में दुनिया की बड़ी तेल कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की। यहां उन्होंने वेनेजुएला के तेल क्षेत्र में करीब 9 लाख करोड़ रुपए के निवेश की बात कही।
अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत ने तेल खरीदना बंद किया था
वेनेजुएला पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (OPEC) का सदस्य है। उसके पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, लेकिन वह वैश्विक सप्लाई का सिर्फ करीब 1% ही देता है।
अमेरिका ने 2019 में वेनेजुएला पर बहुत कड़े आर्थिक प्रतिबंध (सेंक्शंस) लगा दिए थे, अमेरिका ने सेकेंडरी सेंक्शंस भी लगा दिए, यानी जो भी देश या कंपनी वेनेजुएला से तेल खरीदती है, उसे अमेरिकी बाजार में व्यापार करने या बैंकिंग सुविधाओं से रोक दिया जा सकता था।
इस वजह से कई देशों ने वेनेजुएला का तेल खरीदना बंद कर दिया। भारत भी वेनेजुएला से बहुत ज्यादा तेल खरीदता था। कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि तब भारत अपने कुल तेल आयात का लगभग 6% वेनेजुएला से लेता था।
अगर भारत को फिर से वेनेजुएला का तेल खरीदने की अनुमति मिल जाती है, तो उसे अलग-अलग देशों से तेल मंगाने का एक और विकल्प मिलेगा। इससे भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

ट्रम्प ने शुक्रवार को व्हाइट में दुनिया की बड़ी तेल कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक की।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता
अमेरिका ने कुछ समय के लिए (2023-2024 में) वेनेजुएला पर आंशिक रूप से सेंक्शंस ढीले किए, जिससे भारत ने फिर से वेनेजुएला से तेल खरीदा।
2024 में भारत का आयात औसतन 63,000 से 1 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया। इसके बाद 2025 में वेनेजुएला से भारत का तेल आयात बढ़कर करीब 1.41 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
लेकिन मई 2025 में अमेरिका ने एक बार फिर से वेनेजुएला के तेल पर सख्ती बढ़ा दी। इसके बाद 2026 की शुरुआत में वेनेजुएला से भारत का क्रूड आयात सिर्फ 0.3% रह गया।
वेनेजुएला से तेल खरीदने की कोशिश में रिलायंस
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारत की बड़ी निजी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने वेनेजुएला से फिर से कच्चा तेल खरीदने के लिए अमेरिका से मंजूरी लेने की कोशिश शुरू कर दी है। इस मामले से जुड़े दो सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
रिपोर्ट के मुताबिक ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि पश्चिमी देश भारत पर रूस से तेल आयात कम करने का दबाव बना रहे हैं और रिलायंस अपने लिए वैकल्पिक तेल सप्लाई सुरक्षित करना चाहती है।
सूत्रों के मुताबिक, रिलायंस के प्रतिनिधि इस मंजूरी के लिए अमेरिका के यूएस स्टेट डिपार्टमेंट और यूएस ट्रेजरी डिपार्टमेंट से बातचीत कर रहे हैं। इस पूरे मामले पर रिलायंस इंडस्ट्रीज ने रॉयटर्स की ओर से भेजे गए ईमेल का तुरंत कोई जवाब नहीं दिया।

गुजरात के जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज का रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स।
पिछले साल रोजान 63,000 बैरल तेल खरीदती थी रिलायंस
रिलायंस ने पहले भी अमेरिका से लाइसेंस लेकर वेनेजुएला से तेल खरीदा था। कंपनी के पास दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स है। यह गुजरात में स्थित है और इसकी कुल क्षमता लगभग 14 लाख बैरल प्रतिदिन है।
2025 के पहले चार महीनों में वेनेजुएला की कंपनी PDVSA ने रिलायंस को चार जहाजों से तेल भेजा था, जो रोजाना करीब 63,000 बैरल के बराबर था।
लेकिन मार्च-अप्रैल 2025 में अमेरिका ने ज्यादातर लाइसेंस सस्पेंड कर दिए और वेनेजुएला से तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ की धमकी दी, जिसके बाद मई 2025 में रिलायंस का आखिरी वेनेजुएलन तेल का जहाज भारत पहुंचा था।
रिलायंस ने गुरुवार को कहा था कि अगर अमेरिकी नियमों के तहत गैर-अमेरिकी खरीदारों को वेनेजुएला से तेल बेचने की इजाजत मिलती है, तो वह दोबारा खरीद पर विचार करेगी।

