लखनऊ : जौनपुर के सिद्धार्थ सिंह को PET (प्रारंभिक पात्रता परीक्षा) देने के लिए 520 किमी दूर मैनपुरी जाना होगा। परीक्षा के लिए उन्हें एक दिन पहले ही घर से निकलने की तैयारी करनी पड़ रही है।
प्रयागराज के मोहम्मद रहमान की परेशानी इससे भी ज्यादा है। उनका सेंटर 650 किमी दूर गाजियाबाद में पड़ा है।
ये दो अभ्यर्थियों की कहानी नहीं, बल्कि PET देने जा रहे करीब 35 लाख युवाओं का दर्द है। वो परेशान हैं कि परीक्षा की तैयारी पर फोकस करे या सफर में लगने वाले ज्यादा समय पर। क्योंकि सबके सेंटर 500 से 600 किमी दूर तय कर दिए गए हैं।
आयोग के अध्यक्ष सत्यनारायण साबत ने कहा कि आयोग परीक्षा में नकल रोकने के लिए कदम उठाता है। परीक्षा केंद्र अब ऑटोमेशन से तय होते हैं। इसलिए इस बार केंद्र थोड़े दूर आवंटित हुए हैं।

क्या परीक्षा के शहर बदले जा सकते हैं? इसका जवाब आयोग के अध्यक्ष ने नहीं दिया।
PET-2026 की परीक्षा 25, 30 अक्टूबर और 1 नवंबर को होगी। इसमें करीब 35 लाख अभ्यर्थी शामिल होंगे। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) की सरकारी नौकरियों के लिए यह प्रारंभिक अर्हता परीक्षा पास करना जरूरी है। इसके बाद ही अभ्यर्थी ग्रुप-बी और ग्रुप-सी के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन कर सकते हैं।
आयोग ने 12 अक्टूबर को अपनी वेबसाइट पर परीक्षा केंद्रों वाले शहरों की जानकारी दी। इसके बाद अभ्यर्थियों का गुस्सा फूट पड़ा। कई छात्र सरकार और आयोग से परीक्षा केंद्र बदलने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि दूर-दराज के शहरों में सेंटर मिलने से परीक्षा की तैयारी के साथ सफर की चिंता भी बढ़ गई है।
अभ्यर्थियों ने सैकड़ों किलोमीटर की दूरी, तो किसी ने सफर के बाद होने वाली थकान को लेकर चिंता जताई।
प्रतापगढ़ के हिमांशु पांडेय कहते हैं- PET परीक्षा को पास किए बिना हम UPSSSC की नौकरी के लिए आवेदन नहीं कर सकते। इस वक्त हर रोज 18 घंटे की तैयारी कर रहे हैं। अब हमें पता चल रहा है कि सेंटर 470 किमी दूर फिरोजाबाद बना दिया है। आप खुद सोचिए, पूरी रात सफर करने के बाद मैं सेंटर पर पहुंच सकूंगा। इतनी थकावट हो जाएगी कि परीक्षा में क्या लिख सकूंगा।

हिमांशु बताते हैं- प्रतापगढ़ से फिरोजाबाद के लिए डॉयरेक्ट बस-ट्रेन नहीं है।
ऐसा ही दर्द पीलीभीत के आरके मौर्य का था। वह कहते हैं कि मेरा सेंटर 240 किमी दूर बिजनौर बनाया गया है। ट्रेन से जाने पर 5 घंटे लग जाते हैं, फिर सेंटर तक पहुंचने की मशक्कत। कुछ मिनट भी लेट हुए, तो परीक्षा सेंटर से लौटा देते हैं। आयोग ने हमारी सहूलियत का ध्यान नहीं रखा।

आरके मौर्य कहते हैं- पीलीभीत से एक भी ट्रेन बिजनौर नहीं जाती। बरेली/मुरादाबाद होकर जाना पड़ा है।
परीक्षा में 10 दिन बचे, कन्फर्म सीट नहीं मिल रही
परीक्षा में अब सिर्फ 10 से 15 दिन का वक्त बचा है। अभ्यर्थियों की शिकायत है कि 500-600 किमी दूर सेंटर होने से ट्रेनों में कन्फर्म टिकट नहीं मिल रहा। कई जिलों के लिए सीधी बस या ट्रेन सुविधा भी नहीं है, जिससे अभ्यर्थियों को एक-दो बार बस या ट्रेन बदलनी पड़ेगी। दूर सेंटर होने की वजह से एक दिन पहले पहुंचना पड़ेगा। आने-जाने का किराया और ठहरने-खाने का खर्च मिलाकर प्रति छात्र 2 हजार रुपए तक का बोझ पड़ेगा।
महिला अभ्यर्थियों के सामने दोहरी दिक्कत है, वो घर से बाहर खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं। जाहिर सी बात है कि उन्हें एक परिजन को साथ लेकर जाना होगा। दो लोगों का किराया, ठहरना और खाना मिलाकर खर्च 3,500 से 4,000 तक पहुंच रहा है। इसके चलते गरीब परिवारों की बेटियां परीक्षा छोड़ने पर मजबूर हो रही हैं।

24 अक्टूबर को प्रयागराज से इटावा जाने वाली ट्रेन में स्लीपर क्लास की सीटें खाली नहीं हैं।
‘सिर्फ स्क्रीनिंग टेस्ट के लिए इतनी भागदौड़ क्यों’
एडमिट कार्ड जारी होने के बाद से ही अभ्यर्थी सोशल मीडिया पर सेंटर बदलने की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि PET सिर्फ ग्रुप-B और ग्रुप-C की सरकारी नौकरियों (लेखपाल, जूनियर असिस्टेंट, VDO) के लिए एक शुरुआती स्क्रीनिंग टेस्ट है। यह कोई फाइनल जॉब देने वाली परीक्षा नहीं है, इसलिए इसके लिए अभ्यर्थियों को इतनी दूर भेजने का कोई मतलब नहीं है।

PET 2026 के नोटिफिकेशन में साफ लिखा है कि इसका स्कोरकार्ड 3 साल तक ही मान्य रहेगा।
सिक्किम की आबादी से 5 गुना PET अभ्यर्थी
तीन दिनों तक चलने वाली यह परीक्षा हर दिन दो शिफ्ट में होगी। आयोग ने प्रदेश के 60 जिलों में कुल 1,372 सेंटर बनाए हैं। इस बार रिकॉर्ड 35 लाख 41 हजार 296 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। हर शिफ्ट में औसतन 6 लाख और एक दिन में लगभग 12 लाख अभ्यर्थी परीक्षा देने निकलेंगे। PET परीक्षा देने वाले कुल अभ्यर्थियों की संख्या सिक्किम राज्य की कुल आबादी लगभग 7 लाख से करीब 5-6 गुना ज्यादा है।
आयोग के अध्यक्ष बोले- अलॉटमेंट कम्प्यूटर से हुए हैं
आयोग के अध्यक्ष सत्यनारायण साबत कहते हैं- उत्तर प्रदेश एक बड़ा प्रदेश है, जहां एक कोने से दूसरे कोने की दूरी करीब 1,100 किलोमीटर है। 35 लाख अभ्यर्थियों के लिए उपलब्ध सेंटरों के लिहाज से सबसे ठीक व्यवस्था लागू की गई है। पूर्वांचल के जिलों जैसे- बनारस, आजमगढ़, बलिया और जौनपुर में अभ्यर्थियों की संख्या ज्यादा है। इसके मुकाबले परीक्षा केंद्र कम हैं। वहीं, पश्चिमी यूपी में अभ्यर्थी कम हैं और केंद्र ज्यादा हैं। इसलिए छात्रों के सेंटर में जरूरत के हिसाब से बदलाव किया गया है।

