- ब्रजराज के जन्मोत्सव पर 11 कुंतल बेसन के लड्डू का लगा भोग
दैनिक उजाला, बलदेव : भगवान श्रीकृष्ण के अग्रज एवं ब्रज के राजा श्री दाऊजी महाराज का प्राकट्योत्सव गुरुवार को बलदेव नगरी में भव्यता, आस्था और दिव्यता के साथ मनाया गया। घंटे-घड़ियाल, नफीरी, झांझ-मंजीरों की गूंज और भजनों से पूरा बलदेव ही नहीं, बल्कि ब्रज का वातावरण भक्तिमय हो उठा।

सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही आराध्य के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा, जो देर शाम तक लगातार बना रहा।
प्राकट्योत्सव के अवसर पर श्री दाऊजी महाराज का विशेष पंचामृत स्नान एवं अभिषेक कराया गया। इसके बाद भव्य श्रृंगार और हीरा-जवाहरात के विशेष दर्शन कराए गए। मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। विशेष दर्शनों के लिए दूर-दराज क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं की कतारें लगातार लगी रहीं। श्रद्धालु मंदिर की परिक्रमा कर स्वयं को धन्य मानते नजर आए और श्री दाऊजी महाराज तथा रेवती मैया के जयकारों से मंदिर परिसर गूंजता रहा।
मंदिर परिसर में समाज गायन, भजन, नफीरी वादन और नंदोत्सव के आयोजन ने जन्मोत्सव की भव्यता को और बढ़ा दिया। नफीरी की धुन और झांझ-मंजीरों की थाप पर महिला-पुरुष और युवतियां भजनों पर झूमते नजर आए। सेवायतों ने समाज गायन में प्राकट्योत्सव से जुड़े पदों का गायन किया। चारों ओर गूंजते जयकारों और भक्तिमय संगीत के बीच श्रद्धालु जन्मोत्सव के आनंद में डूबे रहे।
प्राकट्योत्सव के अवसर पर मंदिर में 108 वेदपाठी एवं विद्वानों द्वारा श्री बलभद्र पाठ का आयोजन किया गया। इसके साथ ही विशेष हवन-यज्ञ हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर पुण्य लाभ अर्जित किया। दोपहर में नंदोत्सव के दौरान नारियल और फल-प्रसाद लुटाया गया।
दधिकांधा में नारियल लूटने की होड़, अनूठी परंपरा के साक्षी बने श्रद्धालु

श्री दाऊजी महाराज के प्राकट्योत्सव पर समाज गायन के बाद दोपहर करीब एक बजे दधिकांधा की अनूठी परंपरा निभाई गई। दही, हल्दी, केसर, मक्खन आदि से मिश्रित प्रसादी स्वरूप छीछी सेवायतों और श्रद्धालुओं पर फेंकी गई। इसके बाद मंदिर की छत से नारियल, मेवा, फल और उपहार लुटाए गए। इन्हें पाने के लिए गोपों के समूह में होड़ मच गई।
मान्यता के अनुसार इस परंपरा से जुड़े मल्लयुद्ध का निर्णायक स्वयं श्री दाऊजी महाराज को माना जाता है। गोपों ने नारियल और उपहार प्राप्त करने के बाद श्री दाऊजी महाराज की परिक्रमा की तथा ‘नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ सहित अन्य पदों का गायन करते हुए उत्सव में भाग लिया।
क्षीर सागर में हजारों श्रद्धालुओं ने किया सेहरों का विसर्जन
बलदेव छठ के अवसर पर क्षीर सागर कुंड में सेहरा विसर्जन की परंपरा भी निभाई गई। विभिन्न देहात क्षेत्रों से आए लोगों ने अपने पुत्र के विवाह के एक वर्ष बाद दूल्हे का सेहरा क्षीर सागर में विसर्जित कर पूजा-अर्चना की। हजारों लोगों ने इस परंपरा में भाग लिया। बलदेव छठ को मोहर छठ के नाम से भी जाना जाता है।
दिनभर बलदेव नगरी में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ बनी रही। जन्मोत्सव के उल्लास में डूबे श्रद्धालुओं के जयकारों, नफीरी और घंटा-घड़ियाल की ध्वनि से पूरा क्षेत्र श्री दाऊजी महाराज की भक्ति में सराबोर नजर आया।

