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Sun. Apr 26th, 2026

देश में 1.53 करोड़ आवारा कुत्ते:70% को सालभर में टीके लगेंगे, तीन मंत्रालयों ने राज्यों को जारी की एडवायजरी

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट द्वारा आठ दिन में दिल्ली-एनसीआर की सड़कों से आवारा कुत्तों को सड़कों से हटाकर शेल्टर होम ले जाने के आदेश के बाद छिड़ी बहस के बीच नई जानकारी समाने आई है।

केंद्र सरकार ने आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं बढ़ने और लावारिस पशुओं द्वारा आमजन को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं पर चिंता जताई है। केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय, पंचायती राज मंत्रालय और मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने ऐसे पशुओं पर नियंत्रण के लिए मास्टर एक्शन प्लान बनाया है।

तीनों मंत्रालयों ने सभी राज्यों को एक एडवाइजरी भेजी है। इसमें कहा गया है कि देश में 1.53 करोड़ आवारा कुत्ते हैं। इनमें 70% का वैक्सीनेशन व नसबंदी एक साल में करने का टारगेट रखा गया है।

इसके अलावा 2019 की पशु गणना के अनुसार देश में 50 लाख बेसहारा पशु हैं। इस अभियान में पहली बार ग्राम पंचायतें भी जुड़ेंगी। अभियान के लिए राज्यों को एनिमल वेलफेयर बोर्ड की मदद लेने को कहा गया है। बता दें कि तीनों मंत्रालयों ने यह कदम केंद्र को आवारा कुत्तों के काटने और बेसहारा पशुओं के कारण हो रहे हादसों की हजारों शिकायतें मिलने के बाद उठाया है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ नई दिल्ली में लोग प्रदर्शन कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ नई दिल्ली में लोग प्रदर्शन कर रहे हैं।

आवारा कुत्तों को लगेगा ग्रीन टैग कॉलर

आवारा कुत्तों को ग्रीन कॉलर टैग पहनाया जाएगा। इस पर उसके वैक्सीनेशन और स्टरलाइजेशन की जानकारी होगी। इसकी सूचना पशुधन पोर्टल पर भी दर्ज करनी होगी।

बेसहारा पशुओं के स्टरलाइजेशन के बाद उनके कान में हरे रंग का टैग लगाया जाए। इससे नगर निकाय के कर्मचारियों को पता चलेगा कि किस पशु को पकड़ना है और किसे नहीं?

राहुल बोले- बेजुबान पशु कोई समस्या नहीं, उन्हें हटाना क्रूरता

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने दिल्ली-एनसीआर से सभी आवारा कुत्तों को हटाने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर मंगलवार को प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ये दशकों से चली आ रही मानवीय और साइंटिफिक पॉलिसी से पीछे ले जाने वाला कदम है। ये बेजुबान पशु कोई ‘समस्या’ नहीं हैं, जिन्हें हटाया जाए।

राहुल ने X पर लिखा, ‘शेल्टर्स, नसबंदी, टीकाकरण और सामुदायिक देखभाल अपनाया जाना चाहिए। इससे बिना क्रूरता के भी डॉग्स को सुरक्षित रखा जा सकता है। पूरी तरह पाबंदी क्रूर-अदूरदर्शी है और हमारी दया-भावना को खत्म करता है। हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि जन सुरक्षा और पशु कल्याण दोनों कैसे साथ-साथ चलें।’

सुप्रीम कोर्ट ने 11 अगस्त को कहा- कुत्ते सड़कों पर वापस नहीं लौटने चाहिए

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली-NCR के सभी आवारा कुत्तों को 8 हफ्ते के भीतर सड़क से हटाने और उन्हें विशेष शेल्टर होम में भेजने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने हिदायत दी कि ये कुत्ते सड़कों पर वापस नहीं लौटने चाहिए।

उधर, राजस्थान हाई कोर्ट ने भी सोमवार को शहरी सड़कों से आवारा कुत्ते और पशु हटाने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच आवारा कुत्तों के बच्चों पर हमले की खबर पर खुद ही नोटिस लेकर सुनवाई कर रही है।

कोर्ट ने इस काम में बाधा डालने वाले व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। कोर्ट ने कहा, कोई व्यक्ति या संगठन बाधा बना तो अवमानना की कार्यवाही की जा सकती है। कोर्ट ने पशु एवं कुत्ते प्रेमियों को आड़े हाथों लेते हुए सवाल किया कि क्या वे रेबीज के शिकार बच्चों को वापस ला पाएंगे? बच्चों को किसी भी कीमत पर रेबीज नहीं होना चाहिए।

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