मथुरा : जीएलए विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल रिसर्च द्वारा स्नातक एवं परास्नातक फार्मेसी विद्यार्थियों के लिए एक अत्यंत उपयोगी एवं उद्योग उन्मुख अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को औषधि उद्योग की वास्तविक कार्यप्रणालियों, आधुनिक तकनीकों एवं नियामकीय प्रक्रियाओं की गहन जानकारी प्रदान करना था, ताकि वे अपने शैक्षणिक ज्ञान को व्यावहारिक दृष्टिकोण से जोड़ सकें।
इस अवसर पर सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड, गुरुग्राम में सह-उपाध्यक्ष (विश्लेषणात्मक विकास विभाग) डॉ. आशुतोष शर्मा ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने “एपीआई से एएनडीए: जेनरिक औषधि उद्योग में विश्लेषणात्मक विज्ञान” विषय पर विस्तृत व्याख्यान देते हुए जेनरिक औषधि उद्योग की कार्यप्रणाली को सरल एवं प्रभावी ढंग से समझाया। उन्होंने विभिन्न प्रकार की नियामकीय प्रस्तुतियों विश्लेषणात्मक रणनीतियों, गुणवत्ता नियंत्रण, जैव-समानता, विलयन अध्ययन तथा वास्तविक अध्ययन-प्रकरणों के माध्यम से उद्योग की जटिलताओं और चुनौतियों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने यह भी बताया कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि विश्लेषणात्मक सोच, समस्या समाधान क्षमता और शोध उन्मुख दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को उद्योग की अपेक्षाओं के अनुरूप स्वयं को तैयार करने तथा उच्च स्तरीय प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के लिए निरंतर प्रयासरत रहने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम में सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड, गुरुग्राम में अनुसंधान प्रबंधक भारत गुप्ता ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने विद्यार्थियों के लिए एक सहभागितापूर्ण प्रश्नोत्तरी का आयोजन किया, जिससे पूरे सत्र में उत्साह और ऊर्जा का संचार हुआ। इस गतिविधि ने न केवल विद्यार्थियों की समझ को परखा, बल्कि उन्हें सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित भी किया। इसके पश्चात आयोजित प्रश्न-उत्तर सत्र में विद्यार्थियों ने अपने करियर, शोध, उद्योग में अवसरों एवं चुनौतियों से जुड़े कई प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तारपूर्वक उत्तर दिया। इस संवादात्मक सत्र ने विद्यार्थियों को सीधे उद्योग विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर प्रदान किया, जिससे उनकी समझ और अधिक सुदृढ़ हुई।
कार्यक्रम के दौरान दोनों वक्ताओं ने विद्यार्थियों में अनुसंधान के प्रति रुचि विकसित करने, नवीन तकनीकों को अपनाने तथा औद्योगिक मानकों के अनुरूप स्वयं को तैयार करने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के संवाद विद्यार्थियों को न केवल ज्ञान प्रदान करते हैं, बल्कि उन्हें अपने करियर के प्रति स्पष्ट दिशा भी देते हैं।
इस अवसर पर विभाग के निदेशक डॉ. कमल शाह ने आयोजन टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए अतिथि वक्ताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के उद्योग-शैक्षणिक संवाद संस्थान की उस प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं, जिसके माध्यम से छात्रों को अकादमिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव भी प्रदान किया जाता है।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली, जो उनके अनुप्रयुक्त अधिगम एवं औद्योगिक अनुभव के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाती है। इस प्रकार के आयोजन संस्थान और उद्योग के बीच की दूरी को कम करते हुए विद्यार्थियों को भविष्य के लिए अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। विभाग एसोसिएट प्रो. नीतू अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।
जीएलए के बायोटेक छात्रों ने याकुल्ट प्लांट में सीखी आधुनिक तकनीकें

जीएलए विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के बीएससी बायोटेक प्री-फाइनल वर्ष के विद्यार्थियों ने प्रोबायोटिक उत्पाद बनाने वाली अंतरराष्ट्रीय कंपनी याकुल्ट दानोन, सोनीपत का शैक्षिक भ्रमण किया। यह भ्रमण विद्यार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक और व्यावहारिक अनुभव से भरपूर रहा, जहां उन्होंने उद्योग में उपयोग होने वाली अत्याधुनिक तकनीकों और प्रक्रियाओं को नजदीक से समझा।
इस अवसर पर कंपनी के पदाधिकारी शगुन राणा ने विद्यार्थियों को याकुल्ट निर्माण में प्रयुक्त आधुनिक संयंत्रों, गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली तथा उत्पादन की संपूर्ण प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किस प्रकार उच्च स्तरीय स्वच्छता और वैज्ञानिक मानकों का पालन करते हुए प्रोबायोटिक उत्पाद तैयार किए जाते हैं। विद्यार्थियों ने उत्पादन इकाई का अवलोकन करते हुए विभिन्न चरणों को समझा और अपने विषय से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रश्न भी पूछे।
विभागाध्यक्ष प्रो. शूरवीर सिंह ने इस प्रकार के शैक्षिक भ्रमण को विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि ऐसे इंडस्ट्रियल विजिट से छात्रों के व्यावहारिक ज्ञान में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। इससे वे न केवल तकनीकी रूप से सक्षम बनते हैं, बल्कि भविष्य में प्लेसमेंट के बेहतर अवसरों के लिए भी तैयार होते हैं। इस भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों के साथ जैव प्रौद्योगिकी विभाग के प्राध्यापक डॉ. ऋषिकेश शुक्ला एवं डॉ. खुशबू दसौनी ने मार्गदर्शन प्रदान किया।

