मथुरा : जीएलए विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय गूगल जेमिनी एंटरप्राइज प्रशिक्षण एवं इमर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), एजेंटिक एआई और एआई आधारित तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना रहा। उत्तर भारत के पहले गूगल एजेंटिक एआई विश्वविद्यालय के रूप में जीएलए विश्वविद्यालय की इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों को आधुनिक एआई तकनीकों से जोड़ने और उन्हें उद्योग की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया।
जीएलए विश्वविद्यालय और गूगल के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत विद्यार्थियों को उभरती तकनीकों से जोड़ने तथा उन्हें व्यावहारिक एवं उद्योगोन्मुख कौशल प्रदान करने की दिशा में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत 7,000 गूगल जेमिनी एंटरप्राइज लाइसेंस सक्रिय किए गए, जिससे विद्यार्थी प्रशिक्षण के बाद भी एआई आधारित टूल्स का उपयोग करते हुए अपनी समझ और तकनीकी कौशल को विकसित कर सकेंगे।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न शैक्षणिक क्षेत्रों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इसमें इंजीनियरिंग, जैव प्रौद्योगिकी एवं कृषि, प्रबंधन तथा डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के विद्यार्थी शामिल रहे। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को एआई एजेंट बनाने की प्रक्रिया से परिचित कराया गया। विद्यार्थियों ने स्वयं एआई एजेंट तैयार किए और उनके विभिन्न व्यावहारिक उपयोगों को समझा। इसके साथ ही एआई एजेंट प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने अपने द्वारा विकसित एजेंट प्रस्तुत किए।
प्रशिक्षण सत्रों में एंकर क्लाउड की कस्टमर सक्सेस मैनेजर शिंदुजा वीएन, सीनियर एमएल इंजीनियर आकाश राजारामन, एमएल इंजीनियर शर्मिला बालाकृष्णन, एमएल इंजीनियर दीक्षा सुरेश तथा हेड ऑफ ऑपरेशंस प्रशांत ने विद्यार्थियों के साथ संवाद किया। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को एआई एजेंट की कार्यप्रणाली, उसके व्यावहारिक उपयोग और भविष्य में इसके संभावित अवसरों के बारे में जानकारी दी। प्रशिक्षण को पूरी तरह व्यावहारिक रखा गया, जिससे विद्यार्थियों को स्वयं एआई एजेंट बनाने और उनका प्रयोग करने का अवसर मिला। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को गुडिज भी प्रदान किए गए, जिससे विद्यार्थियों में खासा उत्साह देखने को मिला।
जीएलए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अनूप कुमार गुप्ता ने विद्यार्थियों को नई तकनीकों से जोड़ने और उन्हें व्यावहारिक अनुभव प्रदान करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उद्योग विशेषज्ञों के साथ इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों को कक्षा में अर्जित ज्ञान को वास्तविक तकनीकी प्रयोगों से जोड़ने का अवसर प्रदान करते हैं।
विश्वविद्यालय के सीएफओ डॉ. विवेक अग्रवाल ने विद्यार्थियों तक आधुनिक तकनीकी संसाधनों की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में इस पहल के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि 7,000 लाइसेंस के माध्यम से विभिन्न पाठ्यक्रमों के विद्यार्थी प्रशिक्षण के बाद भी एआई टूल्स के साथ प्रयोग और सीखने की प्रक्रिया को जारी रख सकेंगे। कार्यक्रम के समापन पर विद्यार्थियों के लाइसेंस सक्रिय किए गए, जिससे वे आगे भी एजेंटिक एआई और एआई आधारित तकनीकों का अध्ययन एवं प्रयोग कर सकेंगे।
तीन दिवसीय यह कार्यक्रम जीएलए विश्वविद्यालय के एआई आधारित शैक्षणिक वातावरण को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा। 7,000 लाइसेंस, विभिन्न पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों की भागीदारी, व्यावहारिक एआई एजेंट प्रशिक्षण और उद्योग विशेषज्ञों के मार्गदर्शन ने विद्यार्थियों को तकनीक को केवल समझने के बजाय उसे बनाकर सीखने का अवसर प्रदान किया। उत्तर भारत के पहले गूगल एजेंटिक एआई विश्वविद्यालय के रूप में जीएलए विश्वविद्यालय शिक्षा और उद्योग के बीच सहयोग को मजबूत करते हुए विद्यार्थियों को तेजी से बदलती एआई तकनीक के लिए तैयार करने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है।

