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Sat. Feb 7th, 2026

गाड़ी के इंजन को सीज होने से बचायेगा जीएलए के प्रोफेसरों का आइडिया

  • जीएलए मैकेनिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर और टेक्निकल मैनेजर ने सुझाया स्मार्ट इंजन का आइडिया, पेटेंट प्रकाशित

दैनिक उजाला, मथुरा : एक लंबे सफर के दौरान अचानक इंजन सीज होने की समस्या अक्सर देखने को मिलती है। इसका मुख्य कारण तापमान अधिक रहना या फिर कलपुर्जों में समस्या के बारे में चालक को जानकारी न होना रहता है। इस समस्या के समाधान के लिए जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के मैकेनिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर और टेक्निकल मैनेजर ने शोध कर पेटेंट प्रकाशित कराने में सफलता पायी है।

जीएलए मैकेनिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर डा. पीयूष सिंघल, डा. मनोज कुमार अग्रवाल, टेक्निकल मैनेजर रितेश दीक्षित तथा टेक्निशियन ब्रजमोहन अंगीरा ने एक नई तकनीक पर शोध कर पेटेंट पब्लिश कराया है।

मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डा. मनोज अग्रवाल एवं टेक्निकल मैनेजर रितेश दीक्षित ने जानकारी देते हुए बताया कि अब तक गाड़ियां हीटिंग तथा हैड गेस्केट, रेडियेटर फेन, थर्मोस्टेट के कार्य न होने तथा खराब हो जाने के कारण सीज हो जाते हैं। इसलिए इंजन को हीटिंग से बचाने के लिए एक नई तकनीक का विचार साझा किया है।

उन्होंने विचार साझा करते हुए बताया कि अगर गाड़ी के इंजन का तापमान 95-100 डिग्री सेल्सियस के अधिक होता है, तो एक अलार्म बजने लगेगा। अलार्म के माध्यम से कार चालक को पता चल सकेगा कि इंजन का तापमान लगातार बढ़ रहा है। इसके बाद अगर गाड़ी को नहीं रोका और तापमान अधिक हो गया तो तत्काल गाड़ी बंद हो जायेगी और उसी दौरान गाड़ी सही कराकर इंजन सीज होने और अधिक खर्चे से बचा जा सकेगा।

विभागाध्यक्ष प्रो. पीयूष सिंघल ने बताया कि इस तकनीक में बजर और माइक्रोकंट्रोलर ऑर्डिनो का प्रयोग किया जायेगा। बजर अलार्म का कार्य करेगा और माइक्रोकंट्रोलर अधिक तापमान होने पर इंजन के इग्निशियन बंद करने का कार्य करेगा। इसके बाद चालक गाड़ी को सही कराने के लिए कम दूरी पर रेडियेटर फेन को डायरेक्ट चलाकर भी पहुंचा सकता है।

डीन रिसर्च प्रो. कमल शर्मा ने बताया कि मैकेनिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसरों द्वारा साझा किया गया विचार लंबी दूरी पर जाने वाले वाहनों के लिए ठीक है। इससे वाहन को जल्द से जल्द सही कराया जा सकता है। उन्हांने विद्यार्थियों को भी ऐसे विचारों से सीख लेने की सलाह दी और कहा कि विद्यार्थियों को शोध के क्षेत्र बढ़चढ़कर प्रतिभाग करना चाहिए, जो कि देश विकास में सहायक हो सकें।

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